जागरण संवाददाता, जयपुर : राजस्थान में बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर भाजपा लगातार राज्य की अशोक गहलोत सरकार को घेर रही है । अब तक धरने-प्रदर्शन के माध्यम से बेरोजगारी का मुद्दा उठाया जा रहा था । मंगलवार को विधानसभा में भाजपा के विधायकों ने शून्यकाल के दौरान बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरा। विपक्ष के उप नेता राजेंद्र राठौड़ सहित 6 विधायकों ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा।

युवाओं के पास न रोजगार न ही भत्‍ता

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने बेरोजगार के मुद्दे पर सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। स्थगन प्रस्ताव के जरिए यह मामला उठाते हुए पूनिया ने कहा कि गहलोत सरकार 35 महीने का कार्यकाल पूरा कर चुकी है, लेकिन सरकार अपने घोषणा पत्र के अनुसार न तो युवाओं को रोजगार दे रही है और न ही बेरोजगारी भत्ता दिया जा रहा है।

श्‍वेत पत्र जारी करे, वादा नहीं किया पूरा

उन्होंने कहा कि देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी राजस्थान में है। सरकार को श्वेत पत्र जारी कर बताना चाहिए कि अब तक कितने लोगों को रोजगार और बेरोजगारी भत्ता दिया गया। भाजपा विधायकों ने कहा कि प्रदेश के 2.67 करोड़ युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने का झूठा वादा किया गया था। लेकिन सत्ता में आने के बाद यह वादा पूरा नहीं किया जा रहा है।

राजस्थान में बेरोजगारी दर 28 फीसदी है

विधायक दीप्ति माहेश्वरी ने कहा कि देश में बेरोजगारी का राष्ट्रीय औसत 7 प्रतिशत है, लेकिन राजस्थान में बेरोजगारी दर 28 फीसदी है। प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में 2 लाख पद खाली हैं।

बिजली के मुद्दे पर भाजपा का वॉकआउट

मंगलवार को उर्जामंत्री बीडी कल्ला ने बिजली की स्थिति को लेकर विधानसभा में सरकार का पक्ष रखा। कल्ला ने बिजली महंगी होने के लिए पिछली भाजपा सरकार और कोयला महंगा होने को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण कोयला महंगा हुआ है। इस मुद्दे को लेकर भाजपा विधायकों ने नाराजगी जताई। इस दौरान कांग्रेस और भाजपा विधायकों के बीच बहस भी हुई। बाद में भाजपा विधायक सदन से वॉकआउट कर गए।

Edited By: Vijay Kumar