जयपुर, [नरेन्द्र शर्मा]। राजस्थान के अलवर अरबन को-ऑपरेटिव बैंक में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। करीब 8 हजार उपभोक्ताओं की 22 करोड़ की जमा पूंजी वाले इस बैंक ने श्रीलंका की एक कम्पनी की 161 करोड़ 50 लाख रूपए की गारंटी दे दी। सरकार और आयकर विभाग को इस मामले की अब जानकारी मिली तो बैंक के चेयरमैन मृदुल जोशी के खिलाफ जांच प्रारम्भ की है।

जानकारी के अनुसार नोटबंदी के कुछ दिन पूर्व ही 26 अक्टूबर,2016 को बैंक ने श्रीलंका में एम्पोरियो फॉर्ट हॉस्पिटेलिटी लिमिटेड नामक कम्पनी की 161 करोड़ 50 लाख रूपए की फंड गारंटी दी। बैंक के चेयरमैन के हस्ताक्षर से जारी इस फंड गारंटी पत्र में कम्पनी के 161 करोड़ 50 लाख रूपए जमा होने की गारंटी दी गई,यह रकम अमेरिकी करेंसी में 25 मिलियन डालर होती है।

कम्पनी ने इस गारंटी के आधार पर श्रीलंका में लोन ले लिया। जांच में जुटे अधिकारियों का कहना है कि बैंक में मात्र 8 हजार उपभोक्ता है वहीं कुल जमा पूंजी 22 करोड़ रूपए है फिर भी इतनी गारंटी देना पूरी तरफ से फर्जीवाड़ा है। चेयरमैन के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराते हुए जांच शुरू कर दी गई है।

उल्लेखनीय है कि नोटबंदी के दौरान इस बैंक में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था। बैंक का पैसा अलवर से दिल्ली ले जाते समय चेयरमैन सहित चार बैंककर्मियों को पकड़ा था। उस समय बैंक में 18 करोड़ रूपए का घोटाला सामने आया था। इसके बाद राजस्थान सरकार ने बैंक में प्रशासक नियुक्त कर दिया था। प्रशासक बी.राम का कहना हैकि बैंक में जो दस्तावेज मिले है उनसे साफ होता है कि चेयरमैन मृदुल जोशी ने श्रीलंका में एक कम्पनी को 25 मिलियन डालर की गारंटी दी थी। अब जांच एजेंसियां जांच में जुटी है। आगामी दिनों में कुछ ओर खुलासा होगा। 

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