अलवर, जागरण संवाददाता। राजस्थान में अलवर जिले के थानागाजी क्षेत्र में गत 26 अप्रैल को पति के सामने दलित महिला से हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में दैनिक जागरण के सामने दंपति ने अपने साथ करीब तीन घंटे तक हुई दरिंदगी की दास्तां यूं बयां की हैः

पति ने बताया 

परिवार में कुछ दिन बाद होने वाले विवाह समारोह की तैयारियां चल रही थी। मैं जयपुर में प्राइवेट नौकरी करता हूं, छुट्टी लेकर गांव आया था। 26 अप्रैल को करीब ढ़ाई बजे कपड़े खरीदने के लिए पत्नी के साथ बाइक पर नारायणपुर कस्बे के लिए घर से निकले थे। थाना गाजी के चौगान चौराहे पर दो बाइक पर सवार पांच युवकों ने हमें रोका और अपनी बाइक हमारे आगे लगा दी। हम दोनों के बाइक से नीचे उतरते ही पांच युवकों पत्नी के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी, इस पर मैंने एक युवक को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद पांचों युवक हम दोनों को जबरदस्ती पकड़कर मुख्य सड़क से दूर रेत के टीलों में ले गए। वहां ले जाकर पहले तो हमारे साथ मारपीट की और फिर दोनों के कपड़े फाड़ दिए, हम दोनों निर्वस्त्र हो गए।

युवकों ने मुझे बंधक बना लिया और फिर बारी-बारी से मेरी पत्नी के साथ दुष्कर्म किया। पत्नी ने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट भी की। उनमें से एक युवक ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी अपने मोबाइल से बनाया और किसी को बताने पर हमें जान से मारने की धमकी दी। मेरी जेब में रखे छह हजार रुपये और मोबाइल फोन भी पांचों युवकों ने ले लिया और हमें करीब साढ़े पांच बजे वहीं छोड़कर चले गए। हम दोनों भयग्रस्त होकर घर पहुंचे। बदनामी और परिवार में विवाह के कारण किसी को नहीं बताया। दो दिन तक हम चुप रहे, लेकिन बाद में उन्होंने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे मांगे तो मैं 30 अप्रैल को एसपी साहब से मिला। उन्होंने एसएचओ के पास भेजा,वहां मुझे कहा गया कि अभी चुनाव चल रहे हैं, शांत रहो बाद में मामले को देखेंगे। इसके बाद फिर एसपी साहब से मिला तो उन्होंने भी यही बात कही, आखिरकार दो तारीख को एफआइआर दर्ज की गई।

पत्नी बोली 

रोते हुए पीड़िता बोली मेरे साथ गलत काम किया है, उन पांचों को फांसी देनी चाहिए, जिससे वे दूसरी औरत के साथ गलत काम नहीं करे सके।

पुलिस के आला अधिकारियों ने जानबूझकर दबाया मामला

दलित महिला के साथ उसके पति के सामने दुष्कर्म मामले में उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों को इस मामले की पूरी जानकारी थी। लेकिन लोकसभा चुनाव में यह मामला चुनावी मुद्दा नहीं बन जाए, इस कारण इसे दबाए रखा गया। पहले तो पुलिस अधीक्षक सहित अन्य जिम्मेदार अफसर पीड़ित दंपति की रिपोर्ट दर्ज करने को ही तैयार नहीं थे। लेकिन बाद में पीड़ितों द्वारा अनशन पर बैठने की बात कहने के बाद दो मई को मामला दर्ज किया गया, जबकि पीड़ित 30 अप्रैल को पुलिस अधीक्षक और थानेदार से मिला था। जानकारी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक ने इस मामले की जानकारी जयपुर पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों को दी थी, लेकिन उन्होंने चुनाव तक इस मामले को टालने के निर्देश दिए थे।

पीड़ितों से मिली मंत्री

राज्य सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश बुधवार दोपहर में पीड़ित पति-पत्नी से मिली और उन्हे न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। भूपेश ने दोनों से कहा कि सरकार उनके साथ है।  

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Posted By: Sachin Mishra

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