जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने कुछ समय पूर्व ही उन्मादी हिंसा (मॉब लिंचिंग) रोकने के लिए कानून बनाया है। उन्मादी हिंसा रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। लेकिन बदहाल कानून-व्यवस्था के लिहाज से पूरे देश में बदनाम अलवर में तो पुलिसकर्मी ही उन्मादी हिंसा के शिकार हो गए।

यहां लोगों ने दो पुलिसकर्मियों की जमकर पिटाई की। दोनों पुलिसकर्मियों को काफी चोट आई है, उनका अलवर के सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है। मामला अलवर जिले के मुंडावर थाना क्षेत्र का है जहां हिंसक भीड़ ने दो पुलिसकर्मियों की जमकर पिटाई कर दी। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिसकर्मी शराब के नशे में धुत्त होकर पारिवारिक विवाद का निपटारा कराने आए थे।

जानें, क्या है मामला

अलवर जिले में मुंडावर पुलिस थाना क्षेत्र के जागीवाड़ा गांव का मामला है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार रात सर्किल गश्त के दौरान भिवाड़ी पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना मिली थी कि जागीवाड़ा गांव में दो महिलाओं को उनके ससुराल में बंधक बनाकर मारपीट की जा रही है। इसकी सूचना मिलने पर उप-निरीक्षक रामस्वरूप बैरवा और कॉन्स्टेबल शिवरतन सहित आधा दर्जन पुलिसकर्मी गांव में पहुंचे। इसी दौरान महिलाओं के पीहर पक्ष के लोग भी वहां पहुंच गए। दोनों महिलाएं सगी बहन है और उनका विवाह एक ही परिवार में हुआ है।

ग्रामीणों का आरोप है पुलिसकर्मी शराब के नशे में धुत्त थे और जबरन महिलाओं को ले जाने की कोशिश कर रहे थे। ग्रामीणों ने कहा कि महिला कांस्टेबल के बिना वो महिलाओं को नहीं भेजेंग । यह सुनकर पुलिसकर्मी उत्तेजित हो गए और फिर दोनों पक्षों में विवाद हो गया। ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया तो शेष पुलिसकर्मी तो बचकर निकल गए, लेकिन रामस्वरूप बैरवा और शिवरतन की पिटाई कर दी गई। मौके से निकले पुलिसकर्मियों ने घटना की जानकारी अधिकारियों को दी तो अतिरिक्त पुलिस बल गांव में पहुंचा और दोनों पुलिसकर्मियों को ग्रामीणों से मुक्त कराकर अलवर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया।

रामस्वरूप बैरवा ने ग्रामीणों पर राफल छीनने का आरोप लगाया है। वहीं, ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों के शराब के नशे में महिलाओं अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है। दोनों तरफ से एक-दूसरे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। 

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Posted By: Sachin Mishra

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