जागरण संवाददाता, जयपुर। संसद में सरकार के अवश्विास प्रस्ताव पर बहस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के गले लगने को लेकर चल रही सियासत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। अब कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को कहा है कि ''राहुल गांधी भावुक होकर मोदी से मिलने गए, एक राष्ट्रीय पार्टी का अध्यक्ष चलकर उनके पास गया, यह एक शिष्टाचार है।

पिछली बार वसुंधरा राजे के शपथ ग्रहण में मैं गया, मैं गया तो मोदीजी मेरे गले लग गए, अब मैं यह कहूं कि मोदीजी मेरे गले पड़ गए, मोदी जी अगर खड़े होकर राहुल गांधी से गले मिल लेते तो इतिहास की बहुत बड़ी घटना होती' ,लेकिन उन्होंने शिष्टाचार नहीं निभाया। गहलोत ने जयपुर में मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी ने तो हमेशा पद का सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हर चीज में राजनीति नहीं करती, यह काम भाजपा का है। 

गौरतलब है कि लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी को गले लगाने के एक दिन बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, प्यार और सहानुभूति के जरिये ही देश का निर्माण किया जा सकता है। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए राहुल ने कहा, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में घृणा, भय और गुस्से का जिक्र किया। निश्चित ही उनके इस वक्तव्य से कुछ लोगों को प्रेरणा मिली होगी लेकिन कांग्रेस प्यार और सहानुभूति से इसका जवाब देना चाहती है। हम इस बात को साबित कर देंगे कि सभी भारतीयों के मन में प्रेम और सहानुभूति के भाव हैं। केवल इन्हीं के जरिये देश का निर्माण किया जा सकता है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह बात ट्विटर के जरिये कही है। राहुल गांधी ने शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नोटबंदी, बेरोजगारी, राफेल सौदा, अर्थव्यवस्था की बुरी दशा, भीड़ द्वारा की जा रही हत्याओं और दलितों-महिलाओं के उत्पीड़न की घटनाओं पर केंद्र सरकार को घेरा था। उन्होंने प्रधानमंत्री पर जुमला स्ट्राइक करने का आरोप लगाया था। अपने 45 मिनट के भाषण के बाद राहुल अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास गए और उन्हें गले लगाया था। इसके बाद प्रधानमंत्री ने उनसे हाथ मिलाया था। इसके बाद प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में राहुल गांधी की कही बातों और गले लगाने के उपक्रम का खास अंदाज में जवाब दिया। 

 

Posted By: Sachin Mishra