उदयपुर, संवाद सूत्र। कोविशील्ड टीकाकरण के बाद 85 फीसदी लोगों में एंटीबाडी विकसित हुई। जिनमें से पचास फीसदी से अधिक में इसका स्तर उच्चतम था। यह उदयपुर के पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल की ओर से किए गए शोध के परिणाम हैं, जो गुरुवार को जारी किए गए। यहां के शोध परिणाम लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में हुए सर्वे से बिलकुल विपरीत हैं। लखनऊ सर्वे में वेक्सिनेशन करा चुके लोगों में मात्र 7 प्रतिशत में एंटीबाडी बनी तथा कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में से केवल 50 प्रतिशत में एंटीबाडी बनना पाया गया।

उदयपुर में पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के औषधि विभाग के पूर्व विभागाघ्यक्ष एवं वर्तमान में औषधि डायरेक्टर डॉ. एस. के. वर्मा तथा बायोकेमिस्ट्री विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नीता साही के संयुक्त तत्‍वाधान में टीकाकरण के बाद बनने वाली एंटीबाडी पर सर्वे किया गया। इस रिसर्च के लिए तीन समूह बनाए गए। प्रथम समूह में इस अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक, इंटर्न एवं नर्सिंगकर्मियों को कोविशील्ड टीका (वैक्सीन समूह) लगाने की पहली खुराक के एक महीने बाद शरीर में बनने वाली एंटीबाडीज पर सर्वे किया गया। जबकि दूसरे समूह में उन लोगों को शामिल किया गया जो कोरोना की चपेट में आने के बाद स्वस्थ हुए, जिसेकोरोना समूह नाम दिया गया तथा तीसरा समूह उन लोगों का था जो ना तो कोरोना की चपेट में आए और ना ही उन्होंने किसी तरह का टीका लगवाया।

रिसर्च के परिणामों को लेकर डॉ एस.के.वर्मा ने बताया की वैक्सीन समूह में प्रथम खुराक के एक महीने बाद ही 80 प्रतिशत लोगों में एंटीबाडी विकसित हो गयी। इनमें से भी 42 प्रतिशत में इसका स्तर उच्चतम था। दूसरे समूह जिसमें कोरोना से ठीक हुए लोग शामिल थे, उनमें उच्चतम स्तर तक एंटीबाडी थे, जबकि तीसरे समूह में एंटीबाडी का स्तर शून्य था। टीके की दूसरी खुराक के एक महीने बाद एंटीबाडी का स्तर 85 प्रतिशत में पाया गया। साथ ही जिन लोगों में प्रथम खुराक के बाद एंटीबाडी विकसित नहीं हुई, उनमें से पचास फीसदी से अधिक पूर्ण रूप से प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न हो गयी थी।

इस शोध का परिणाम निकला कि कोविशील्ड टीका लगवाने से 85 प्रतिशत लोगों में कोरोना से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता विकसित हुई, जबकि 53 प्रतिशत में यह क्षमता अपने उच्तम स्तर पर थी। रिसर्च टीम में शामिल डॉ नीता साही का कहना था कि अध्ययन में सम्मिलित सभी लोगों में टीकाकरण के समय तथा बाद में भी कोई विशेष दुष्परिणाम का सामना नहीं करना पड़ा।

पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल के चेयरमैन राहुल अग्रवाल का कहना है कि वर्तमान शोध परिणामों को प्रकाशन के लिए अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में भेजा गया है। इस अध्ययन को जारी रखा जाएगा तथा अगले छह महीने बाद एक बार फिर एंटीबाडी स्तर की जांच करके देखा जायेगा कि कोरोना से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता कितने लोगों में कितने समय तक रहती है।

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