जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। राजस्थान में फिर से सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही वसुंधरा राजे सरकार ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बड़ा निर्णय कर मुस्लिम विरोधी वोट बैंक को मजबूत करने करने की चाल चली है।

दरअसल,वसुंधरा राजे सरकार ने प्रदेश के 27 मुस्लिम नाम वाले गांवों के नाम बदलने का निर्णय किया है। केन्द्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद इनमें से 8 गांवों के नाम बदल दिए गए है। गांवों के नाम बदलने के साथ ही मुस्लिम नाम वाले विभिन्न शहरों के प्रमुख मोहल्लों और मार्गों के नाम भी बदलने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके लिए स्वायत्त शासन और स्थानीय निकाय विभाग ने नीचले स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए है। ये अधिकारी क्षेत्रीय विधायक,महापौर और स्थानीय निकाय के सभापति की सलाह से नाम बदलने के आदेश जारी करेंगे।

अनौपचारिक रूप से अधिकारियों को कहा गया है कि गांवों के साथ ही मोहल्लों और मार्गों का नाम बदलने के लिए भाजपा पदाधिकारियों के साथ ही आरएसएस के स्वयंसेवकों की सलाह को भी प्राथमिकता दें। सरकारी भवनों के नाम भी बदलने अथवा पहली बार इनका नामकरण भी अगले कुछ दिनों में हो जाएगा। नाम बदलने के पीछे तर्क ये दिया गया है कि ऐसे बहुत से मुस्लिम नाम वाले गांव और मोहल्ले है,जहां हिन्दुओं की बहुलता है और मुसलमानों की आबादी ना के बराबर है।

सरकार का कहना है कि ग्रामीणों की मांग और पंचायत की सिफारिश पर नाम बदलने को लेकर कदम उठाया गया है। प्रदेश के राजस्व विभाग ने 27 गांवों के नाम बदलने को लेकर केन्द्रीय गृह मंत्रालय से अनुमति मांगी थी,इनमें से 8 गांवों के नाम बदलने की मंजूरी मिल गई है ।

इन गांवों के नाम बदले

नाम बदलने वाले गांवों इस्माइल खुर्द, मियों का बाड़ा और नरपाड़ा के नाम बदलकर क्रमश: पिचनवा खुर्द, महेश नगर और नरपुरा कर दिए गए हैं। दिलचस्‍प यह है कि दोनों गांवों के मुस्लिम नाम थे जिन्‍हें बदलकर हिंदू किया गया है। इनके साथ ही आजमपुर,नवाबपुरा,पापड़दा और जीरोता के नाम भी बदले गए है। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लोगों ने शिकायत की थी कि गांव के नाम की वजह से युवाओं के लिए शादी के रिश्ते नहीं आ रहे हैं।

अब इन मोहल्लों और मार्गों के नाम बदले जाएंगे

जयपुर की मदीना कॉलोनी,रामगंज बाजार,मिर्जा इस्माइल रोड़ एवं अजमेर के दरगाह बाजार,खादिम मोहल्ला और अंदरकोट के नाम बदले जाने पर विचार किया जा रहा है। इनके नाम बदले जाने को लेकर अगले कुछ दिनों में अधिकारिक घोषणा हो जाएगी।

यूपी में नाम बदलने की पुरानी परम्परा

शहरों,गांवों और मोहल्लों के नामों को बदलने की कवायद नई नहीं है। उत्‍तर प्रदेश में ही मायावती सरकार के समय अकबरपुर अंबेडकरनगर हो गया, कासगंज बना कांशीराम नगर, हाथरस हो गया महामाया नगर, कानपुर देहात हो गया रमाबाई नगर और शामली को प्रबुद्ध नगर कहा जाने लगा। अमेठी भी छत्रपति शाहूजी महाराज नगर कर दिया गया. इसी तरह हापुड़ पंचशील नगर और अमरोहा ज्योतिबा फूले नगर हो गया। हाल ही में मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन रखा गया है। हरियाणा में भी गुडगांव का नाम बदलकर गुरूग्राम किया गया है।

मंत्री बोले,लोगों की मांग पर किया निर्णय

-कांग्रेस का आरोप,भाजपा आपसी सौहार्द बिगाड़ना चाहती है। प्रदेश के राजस्व मंत्री अमराराम और खाघ मंत्री बाबूलाल वर्मा का कहना है कि लोगों की मांग पर नाम बदले जा रहे है,इसमें राजनीति नहीं करनी चाहिए। इधर कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य रघुवीर मीणा का कहना है कि चुनाव निकट आते ही भाजपा लोगों को आपस में लड़ाने के काम में जुट जाती है। भाजपा आपसी सौहार्द का माहौल बिगाड़ना चाहती है। 

Posted By: Preeti jha