जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। कांग्रेस में सियासी संकट पिछले चार दिन से चल रहा है। राजस्थान कांग्रेस के इस सियासी संकट के कारण भाजपा को दोनो तरफ से राजनीतिक लाभ दिख रहा है। भाजपा नेताओं का मानना है कि अगर सचिन पायलट कांग्रेस छोड़ते हैं तो अशोक गहलोत सरकार गिरेगी और इसका भाजपा को लाभ होगा। अगर पायलट अलग मोर्चा बनाते हैं तो भी भाजपा को फायदा होगा, कांग्रेस कमजोर होगी।

पायलट के मोर्चे को भी अगर समर्थन दिया जाए तो आगे जाकर फायदा भाजपा को हीं होगा। उधर इस सियासी संकट के बीच राजनीतिक क्षेत्रों में मध्यप्रदेश और राजस्थाान के राजनीतिक हालात की तुलना की जा रही है। लेकिन असल में राजस्थान और मध्य प्रदेश में काफी अंतर है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच मात्र 5 सीटों का अंतर था। लेकिन राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा के बीच करीब 35 सीटों का अंतर है। इनमें 10 निर्दलीय और 2 माकपा विधायक शामिल हैं।

भारतीय ट्राइबल पार्टी के 2 विधायक सोमवार तक तो गहलोत के साथ नजर आ रहे थे, लेकिन देर रात पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साफ किया कि वे भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी रखेंगे। मध्य प्रदेश में बागी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की महत्वाकांक्षा मुख्यमंत्री बनने की नहीं थी, लेकिन राजस्थान में सचिन पायलट पिछले पौने दो साल से ही सीएम पद पर आंख लगाए हुए हैं। वे अब भी मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। राजस्थान में सरकार खुद अशोक गहलोत चला रहे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की पूरी दखल थी।

मध्य प्रदेश में भाजपा को उप चुनाव में मात्र 9 सीटों पर चुनाव जीतना होगा, लेकिन राजस्थान में जितने विधायकों के इस्तीफे होंगे, उन सभी जगहों पर उप चुनाव कराने होंगे। राजस्थान में वसुंधरा राजे की  मर्जी के बिना पायलट का साथ देना या पार्टी में लेना भाजपा के लिए मुश्किल होगा। वसुंधरा राजे किसी जनाधार वाले नेता को पार्टी में लेने अथवा सहयोग करने को तैयार नहीं होंगी, वहीं मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ने नेतृत्व के निर्देश मानते हुए ज्योतिरादित्य की हर बात को मान ली थी। 

Posted By: Preeti jha

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