जयपुर, जागरण संवाददाता। कोरोना संक्रमण की दवा "कोरोनिल"बनाकर विवादों में फंसे बाबा रामदेव,आचार्य बालकृष्ण व जयपुर के निम्स यूनिवर्सिटी के चेयरमैन डॉ.बी.एस.तोमर सहित पांच लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। जयपुर के ज्योति नगर व गांधी नगर पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब शनिवार को राजस्थान हाईकोर्ट में कोरोनिल दवा के प्रचार और बिक्री पर रोक लगाने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर हुई है। वकील एस.के सिंह की तरफ से दाखिल की गई इस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है।

याचिका में कहा, नियमों की अनदेखी की गई

एस.के.सिंह द्वारा हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि कोरोनिल दवा के ट्रायल में नियमों की अनदेखी की गई है । ट्रायल से पहले सरकार की आधिकारिक अनुमति नहीं लेने की भी बात सामने आ रही है। ऐसे में जब तक कोरोनिल दवा को लेकर लाइसेंस सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी नहीं कर ली जातीं तब तक राजस्थान में दवा के प्रचार और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए।पतंजलि आयुर्वेद की ओर से जिस निम्स अस्पताल में कोरोना के 50 मरीजों पर दवा के ट्रायल का दावा किया गया था, उसे भी याचिका में पक्षकार बनाया गया है। उसके अलावा आयुष मंत्रालय, आईसीएमआर, पतंजलि आयुर्वेद, राज्य सरकार, चिकित्सा एंव स्वास्थ्य विभाग को भी पक्षकार बनाया गया है।

इससे पहले शुक्रवार को वकील बलराम जाखड़ ने बाबा रामदेव सहित अन्य चार के खिलाफ जयपुर के ज्योति नगर थाने में मामला दर्ज करवाया था। शिकायत में कहा गया है कि इन्होंने कोरोना वायरस की दवा के तौर पर कोरोनिल को लेकर भ्रामक प्रचार किया। एफआईआर में योग गुरू बाबा रामदेव, बालकृष्ण, पतंजलि के वैज्ञानिक अनुराग वार्ष्णेय, निम्स के अध्य्क्ष डॉ. बलबीर सिंह तोमर, निदेशक डॉ. अनुराग तोमर को आरोपी बनाया गया है। इससे पहले डॉ.संजीव गुप्ता ने गांधी नगर पुलिस थाने में परिवाद दायर किया था,जिसे जांच के बाद एफआईआर में बदला गया है ।

उल्लेखनीय है कि राज्य के चिकित्सा मंत्री डॉ.रघु शर्मा पहले ही कह चुके हैं कि अगर राजस्थान में कोरोनिल बिकी तो बाबा रामदेव जेल में होगा । शर्मा के निर्देश पर चिकित्सा विभाग ने निम्स यूनिवर्सिटी से स्पष्टीकरण मांगा है । 

Posted By: Preeti jha

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस