जयपुर, जागरण संवाददाता। गरीब कल्याण अभियान के तहत लॉकडाउन के दौरान विभिन्न राज्यों से अपने गृह प्रदेश लौटे 8 लाख मजदूरों को रेलवे मंत्रालय रोजगार उपलब्ध कराएगा। इनमें राजस्थान के 4 लाख 22 हजार 317 लोग शामिल है। गरीब कल्याण अभियान के तहत मजदूरों को काम देने के लिए केंद्रीय रेल मंत्रालय का एक पत्र राजस्थान सरकार को मिला है। इसी तरह का पत्र अन्य राज्य सरकारों को भेजा गया बताया।

रेलवे के जयपुर मंडल के अधिकारियों के अनुसार गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत रेलवे ने 1800 करोड़ के प्रोजेक्ट में 8 लाख से ज्यादा मजदूरों को काम देने की योजना बनाई है। ये काम अगले 125 दिनों तक चलेंगे। ये शुरूआती प्रोजेक्ट है, इसके बाद भी ट्रेक के नवीनीकरण और दूसरे कामों से ये लोग नए प्रोजेक्ट के तहत जुड़े रह सकते हैं।इस योजना के क्रियान्वयन के लिए रेल मंत्रालय ने 6 राज्यों के 116 जिलों में नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए हैं। रेलवे में इस समय 160 ऐसे निर्माण कार्य है जिन में इन मजदूरों को रोजगार दिया जा सकता है।

कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन होते ही देश के विभिन्न राज्यों में मजदूरी कर रहे लोग अपने घर आए गए थे। उनमें राजस्थान में पाली जिले के 14,0023, उदयपुर के 1,27,493, जालौर के 1,5,659, नागौर में 86,990, सिरोही के 76,408, डूंगरपुर के 63,387, सीकर के 48,591, राजसमंद के 46345, बाड़मेर के 46,329, चित्तोडगढ़ के 45,600, अलवर के 45,377, करौली के 42,100, जोधपुर के 39,820, भीलवाड़ा के 38,455, भरतपुर के 38,355, बांसवाड़ा के 32,929, अजमेर के 32,564, हनुमानगढ़ के 30,217, चूरू के 27,628, झुंझुनूं के 27,494 एवं जयपुर जिले के 26,047 मजदूर शामिल है।

ये आधिकारिक आंकड़े हैं, लिहाजा मजदूरों की संख्या कुछ ज्यादा भी हो सकती है जो बिना रजिस्ट्रेशन के अपने गृहराज्य में पहुंचे हैं। फिलहाल, रेलवे को राज्य सरकार के जवाब का इंतजार है। लौटे हुए मजदूरों को अगर इस अभियान के तहत रोजगार मिलता है वो बिना किसी दूसरे राज्य में गए अपने गृह प्रदेश में अपनी आजीविका आसानी से चला सकते है। 

Posted By: Preeti jha

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