नरेन्द्र शर्मा, जयपुर। राजस्थान में सत्ता बदलने के साथ ही योजनाओं के नाम बदलने का प्रचलन पुराना है । जब-जब सत्ता परिवर्तन होता है,नई सरकार पूववर्ती सरकार की योजनाओं को या तो बंद कर देती है या फिर नया नाम देकर संचालित है । इसी कड़ी में अशोक गहलोत सरकार ने करीब पौने दो साल के कार्यकाल में पिछली वसुंधरा राजे सरकार की एक दर्जन योजनाओं के नाम बदले हैं।

सीएम गहलोत ने वसुंधरा राजे सरकार की कई योजनाओं के नाम बदलकर कांग्रेस के नेताओं के नाम से इन्हे नया स्वरूप दिया है । दो दिन पहले वसुंधरा राजे सरकार की अन्नपूर्णा रसोई का नाम बदलकर इंदिरा रसोई योजना किया गया । पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने नाम बदलने पर राज्य सरकार पर निशाना साधा है ।

कांग्रेस नेताओं के नाम पर किया नामकरण

वसुंधरा सरकार की भामाशाह स्वास्थ्य योजना को बंद कर दिया । वहीं केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना का नाम बदलकर आयुष्मान भारत महात्मा गांधी स्वास्थ्य योजना कर दिया । वहीं विजयाराजे सिंधिया स्वयं सहायता समूह योजना का नाम बदलकर प्रियदर्शिनी आदर्श स्वयं सहायता समूह योजना कर दिया गया । इस योजना के तहत महिला सशक्तिकरण के काम किए जाते हैं । पिछली वसुंधरा सरकार ने राजीव गांधी सेवा केंद्रों का नाम अटल सेवा केंद्र किया था । अब कांग्रेस की सरकार आई तो इन केंद्रों का नाम बदलकर राजीव गांधी अटल सेवा केंद्र कर दिया गया । वहीं डॉ.राधाकृष्णन शिक्षा संकुल का नाम बदलकर राजीव गांधी शिक्षा संकुल किया गया । सभी सरकारी दस्तावेजों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर हटा दी गई।

दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ योजना का नाम मुख्यमंत्री वरिष्ठ नागरिक तीर्थ योजना कर दिया गया । गुरू गोलवरकर ग्रामीण जनभागीदारी योजना का नाम अब महात्मा गांधी ग्रामीण जनभागिदारी योजना,मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना का नाम बदलकर राजीव गांधी जल स्वावलंबन योजना । गांवों में सड़क निर्माण के लिए ग्रामीण गौरव पथ की जगह विकास पथ नाम दिया गया । भामाशाह कार्ड की जगह राजस्थान जन आधार योजना  बना दी है। किसान राहत आयोग का नाम बदल कर कृषक कल्याण कोष कर दिया गया है । इनके अतिरिक्त कुछ अन्य छोटी योजनाओं के नाम अब तक बदले जा चुके हैं ।

Posted By: Vijay Kumar

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस