सुभाष शर्मा, उदयपुर। कोरोना (कोविड-19) महामारी ओर उसके बाद लॉकडाउन की वजह से कर्मचारियों तथा शिक्षकों की मानसिकता प्रभावित हुई है। शोध से प्रमाणित हुआ है कि छियालीस फीसदी से अधिक लोग इस महामारी के चलते ठीक ढंग से सो नहीं पाए। उदयपुर के जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी ने कुलपति प्रो. एसएस सारंगदेवोत के निर्देशन राष्ट्रीय स्तर पर शोध किया और आए नतीजों के बारे में जानकारी दी है।

शोध में देश के विभिन्न संस्थानों के कर्मचारियों तथा शिक्षकों को शामिल किया गया था। उन्होंने बताया कि देश के 81.9 फीसदी लोग मानते हैं कि लॉकडाउन सरकार का सही निर्णय था। साथ ही 54.6 फीसदी व्यक्तियों का मानना है कि लॉकडाउन तथा वर्क एट होम को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसी शोध से जाहिर हुआ कि 46.3 फीसदी लोग कोविड-19 की वजह से सही नींद नहीं ले पा रहे थे। इससे जाहिर होता है कि आने वाले समय में इससे अनिद्रा रोगियों में वृद्धि हो सकती है।

शोध कार्य में यह भी खुलासा हुआ कि जहां 22.9 फीसदी व्यक्तियों के क्रोध में भी तथा 14.3 फीसदी लोगों के भय में भी बढ़ोतरी हुई है। शोध के परिणाम बताते हैं कि 36.8 फीसदी व्यक्तियों के परिवारिक सम्बन्ध सार्थक रूप से प्रगाढ़ हुए हैं। जबकि 21.2 फीसदी की व्यक्तिगत रचनात्मकता में अच्छे हद तक वृद्धि हुई। हालांकि लॉकडाउन के चलते 22.7 फीसदी व्यक्तियों की अपने कार्यालय के प्रति कार्यक्षमता में कमी भी हुई है।

शाकाहार के प्रति बढ़ा रूझान

डॉ. छतलानी बताते हैं कि उनके शोध से यह भी खुलासा हुआ है कि कोविड-19 की वजह से लोगों में शाकाहार के प्रति रूझान बढ़ा है। कोरोना महामारी के भय से कई लोगों ने मांसाहार बंद कर दिया था। जिनमें से 52.5 फीसदी लोग फिर से मांसाहार शुरू नहीं करना चाहते। शोध से यह भी साबित हुआ है कि लॉकडाउन के दौरान ज्यादातर लोगों ने एक से तीन घंटे ही काम किया। ज्यादातर व्यक्तियों ने फल, सब्जियां, राशन तथा स्वच्छता के लिए सामग्री क्रय करने में सर्वाधिक पैसा खर्च किया। लॉकडाउन खुलने के बाद अधिकांश ने वस्तुओं में सेनेटाइजर, मास्क तथा सेवाओं में ऑनलाइन शिक्षा तथा योग को क्रय करने में अधिक रूचि दिखाई।

डॉ. छतलानी बताते हैं कि इस शोध का उद्देश्य लॉकडाउन के दौरान देश के विभिन्न संस्थानों के कर्मचारियों व शिक्षकों की मानसिकता तथा उनकी कार्य क्षमता में किस तरह का बदलाव का पता करना था। इसी तरह उनमें कोरोना को लेकर भय तथा लॉकडाउन के बाद उनके विचार को लेकर अध्ययन करना था।

Posted By: Vijay Kumar

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