जागरण संवाददाता, जयपुर! राजस्थान में शुक्रवार सुबह एक रहस्‍यमयी घटना घटी। जालौर जिले के सांचौर में शुक्रवार सुबह एक उल्कापिंड गिरने से सनसनी फैल गई। वहीं घटना का पता चलते ही  इस उल्कापिंड को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। बाद में पुलिस ने प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में इसे वहां से हटाकर इसे सुरक्षित रखवाया। पुलिस के अनुसार किसी धातु के समान नजर आ रहा यह उल्कापिंड 2.788 किलोग्राम वजनी है। हालांकि जिला कलेक्टर सहित अन्य प्रशासन के उच्‍चाधि‍कारियों ने  इस बारे में कुछ बताने से इंकार किया है।

सांचौर थानाधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि शुक्रवार सुबह 7 बजे  गायत्री कॉलेज के निकट मार्ग पर आसमान से तेज गर्जना के साथ एक चमकदार वस्तु नीचे गिरी । जिसकी इत्तला मिलने पर मय जाप्ता मौके पर पहुंचने पर वहां काले रंग की धातु का एक टुकड़ा जमीन में धंसा हुआ नजर आया। पुलिस के अनुसार करीब चार से पांच फीट की गहराई में जाकर यह टुकड़ा धंस गया। उस समय यह टुकड़ा काफी गरम था। बाद में उपखंड अधिकारी व उप अधीक्षक भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि यह उल्कापिंड है। यह काले रंग की चमकीली धातु जैसा नजर आ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्होंने आसमान से एक तेज चमक के साथ एक टुकड़े को गर्जना के साथ नीचे गिरते देखा। नीचे गिरते ही एक धमाका हुआ। इस उल्कापिंड के ठंडा होने पर पुलिस ने उसे कांच के एक जार में रखवा दिया है। पुलिस का कहना है कि इसे विशेषज्ञों को दिखाया जाएगा।  

उल्काओं का जो अंश वायुमंडल में जलने से बचकर पृथ्वी तक पहुंचता है उसे उल्कापिंड कहते हैं। प्रत्येक रात्रि को उल्काएं अनगिनत संख्या में देखी जा सकती हैं, लेकिन इनमें से पृथ्वी पर गिरनेवाले पिंडों की संख्या बहुत कम होती है। पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें उल्का और साधारण बोलचाल में टूटते हुए तारे कहते हैं।

 

Posted By: Vijay Kumar

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