राज्य ब्यूरो, जयपुर। राजस्थान में कांग्रेस सरकार द्वारा विभिन्न श्रेणियों मे बिजली के दामों में 11 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी के बाद सरकार और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। गहलोत सरकार का आरोप है कि पिछली सरकार ने बिजली चोरी और छीजत रोकने के लिए कुछ नहीं किया, इसलिए दाम बढ़ाने पड़े हैं। वहीं, भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस सरकार एक बार फिर अपने वादे से मुकर रही है।

सरकार का दावा, पिछली सरकार ने बिजली चोरी रोकने पर कुछ नहीं किया

राजस्थान में गुरुवार को विभिन्न श्रेणियों के बिजली कनेक्शनों में 95 पैसे प्रति युनिट और स्थाई शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। इससे मध्यमवर्गीय उपभोक्ता पर भार आया है। इस मामले में ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार के कुप्रबंधन के कारण बिजली वितरण कंपनियों का घाटा एवं देनदारियां लगातार बढ़ती रहीं। पिछली सरकार जाते समय कंपनियों पर करीब 90 हजार करोड़ का घाटा एवं 66 हजार करोड़ रुपये का कर्ज छोड़कर गई। वर्ष 2018-19 में वितरण कंपनियों को 9 हजार 393 करोड़ रुपये का वार्षिक घाटा रहा। कल्ला ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने उदय योजना के तहत वितरण निगमों के वित्तीय सुधार एवं छीजत कम करने की दिशा में कोई गंभीर प्रयास नहीं किए।

कल्ला ने बताया कि विनियामक आयोग द्वारा विद्युत दरों में की गई वृद्धि में से 2469 करोड़ रुपये का भार राज्य सरकार वहन करेगी। इससे 20 लाख बीपीएल व 42 लाख छोटे घरेलू उपभोक्ताओं तथा 14 लाख किसानों की बिजली की दरों में कोई प्रभावी वृद्धि नहीं होगी। इस प्रकार राज्य के कुल 133 लाख उपभोक्ताओं में से 76 लाख उपभोक्ता जो कि कुल उपभोक्ताओं का 57 प्रतिशत है, पर इस बढ़ोतरी का कोई असर नहीं पड़ेगा। कल्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की थी कि पांच साल तक किसानों की विद्युत दरों में वृद्धि का भार सरकार स्वयं वहन करेगी। हम इस वादे को पूरा करते हुए विनियामक आयोग द्वारा किसानों पर की गई 2347 करोड़ की बढ़ोतरी का समस्त भार उठाएंगे। इसी तरह 42 लाख छोटे उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले 122 करोड़ रुपये के भार को भी सरकार वहन करेगी।

भाजपा का आरोप, कांग्रेस सरकार एक बार फिर अपने वादे से मुकरी

इस मामले में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि कांग्रेस सरकार अपने जन घोषणा पत्र के वायदे से एक बार फिर मुकर रही है। बिजली की दरों में बढ़ोतरी इस बात को साबित करता है कि कांग्रेस सरकार किसानों की हितैषी नहीं हैं। बिजली के दाम बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं पर इसकी मार पड़ेगी। टैरिफ को बढ़ाकर लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि कर यह सरकार अपने वादे से मुकर रही है। कांग्रेस सरकार ने वादा किया था कि पांच वषरें में बिजली के दाम नहीं बढ़ेंगे और पूरी बिजली देंगे। रात के समय किसानों को बिजली दी जा रही है, जिससे किसानों को कड़ाके की ठंड में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है एवं कई किसानों की सर्दी से मौत भी हुई है। जो सब्सिडी भाजपा सरकार में किसानों को दी जाती थी, उसे भी दाएं-बाएं किया जा रहा है। इस तरह की बढ़ोतरी निश्चित रूप से सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करती है। सरकार निश्चित रूप से जनाक्रोश का सामना करने के लिए तैयार रहे।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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