पाकिस्तान में दो लाख का इनामी भारत में बना सरपंच, 1971 के युद्ध में की थी सेना की मदद
1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना की मदद करने वाले जासूस पदम सिंह सोढ़ा बाड़मेर के छाछरो गांव के ...और पढ़ें

पदम सिंह सोढ़ा बने छाछरो के पहले सरपंच
HighLights
पदम सिंह सोढ़ा छाछरो गांव के पहले सरपंच चुने गए।
1971 युद्ध में भारतीय सेना को खुफिया जानकारी दी थी।
पाकिस्तान ने उन पर दो लाख का इनाम रखा था।
जागरण संवाददाता, जयपुर । 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भारतीय सेना की सहायता करने वाले जासूस पदम सिंह सोढ़ा बाड़मेर के छाछरो गांव के पहले सरपंच चुने गए हैं। 24 अक्टूबर को हुए सरपंच चुनाव में पदम सिंह ने 338 वोटों से जीत हासिल की।
उन्हें 950 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी धन्ना राम को 612 वोट मिले। युद्ध में अद्भुत योगदान देने वाले इस जासूस पर कभी पाकिस्तान ने दो लाख का इनाम रखा था।
बता दें कि 1971 के युद्ध के दौरान 10 पैरा कमांडो के तत्कालीन लेफ्टिनेंट कर्नल भवानी सिंह ने पाकिस्तान में सिंध प्रांत के छाछरो इलाके पर फतह हासिल करने के लिए एक विशेष रणनीति बनाई थी। दुश्मन की हलचल की सटीक जानकारी हासिल करने के लिए भवानी सिंह ने ठाकुर लक्ष्मण सिंह सोढ़ा और पदम सिंह सोढ़ा को विशेष जिम्मेदारी सौंपी।
सोढ़ा परिवार के सदस्यों ने रेगिस्तानी रास्तों और पाकिस्तानी सेना की चौकियों की पल-पल की खुफिया जानकारी भारतीय सेना तक पहुंचाई। इसी सटीक इनपुट के दम पर 10 पैरा कमांडो की टुकड़ी ने दुश्मन के इलाके में 80 किलोमीटर अंदर घुसकर छाछरो गांव को सात महीने तक अपने कब्जे में रखा।
युद्ध के दौरान भारतीय सेना की मदद करने के कारण तत्कालीन पाकिस्तान सरकार सोढ़ा परिवार से बौखला गई थी। पाकिस्तान सरकार ने ठाकुर लक्ष्मण सिंह सोढ़ा व पदम सिंह सोढ़ा पर दो-दो लाख का इनाम घोषित किया था। युद्ध समाप्त होने के बाद सोढ़ा परिवार और उनके सहयोगी भारत आ गए।
उन्हें बाड़मेर के बावड़ी कला में बसाया गया। हालांकि, सोढ़ा परिवार ने बाद में एक नया गांव बसाया, जिसका नाम छाछरो रखा। बता दें कि सोढ़ा पाकिस्थान के जिस गांव में रहते थे उसका नाम भी छाछरो था। पंचायत चुनाव से पहले हुए परिसीमन के बाद छछरो गांव को पंचायत का दर्जा दिया गया।
