जयपुर, [नरेन्द्र शर्मा]। सरकार चाहे राजस्व के लालच में शराबबंदी की लागू नहीं करे,लेकिन राजस्थान के दस हजार लोगों ने शराब पीना तो दूर शराब छूने तक से परहेज कर लिया। वहीं ग्रामीणों की इस जागरूकता को देख दो शराब के ठेकेदारों ने भी अपनी दुकानें बंद करने के साथ ही घोषणा कर दी कि वे अब कभी भी शराब का धंधा नहीं करेंगे।

राजस्थान में दौसा जिले के गुर्जर बाहुल्य सोलंगा धाड के 16 ग्राम पंचायतों के लोगों ने महापंचायत कर शराब नहीं पीने का निर्णय कर लिया। इन लोगों ने हाथ मे गंगाजल लेकर कहा कि ना तो शराब पीयेंगे और न ही हाथ लगाएंगे। अब तक गुर्जर बाहुल्य गांवो में किसी भी सामाजिक समारोह में शराब पार्टी होना आवश्यक होता था,लेकिन अब ग्रामीणों ने इसे बुराई बताते हुए इससे दूर होने का प्रण लिया है। शराब के  कारोबार में जुड़े दौसा जिले के गुर्जर समाज के 300 लोगों ने भविष्य में कोई नया रोजगार तलाशने की बात भी महापंचायत में कही । महापंचायत के मुखिया बाबा हरी गिरी ने कहा कि दौसा के बाद अब गुर्जर बाहुल्य अन्य क्षेत्रों में शराब बंदी को लेकर अभियान चलाया जाएगा।

इस महापंचायत में खेड़ला बुर्ज अआर जलालपुरा के दो शराब ठेकेदारों ने अपनी दुकानें बंद कर चाबी गांव की पंचायत को सौंप दी। इस मौके पर राजस्थान सरकार के संसदीय सचिव ओमप्रकाश हुडला,शराब बंदी अभियान से जुड़ी पूनम छाबड़ा और पूर्व जिला प्रमुख अजीत सिंह भी मौजूद थे।

उल्लेखनीय है कि बिहार में शराबबंदी लागू किए जाने के बाद राजस्थान में भी शराब बंदी लागू करने की मांग को लेकर आंदोलन हो रहे है। तीन गांवों में तो मतदान के द्वारा शराब की दुकानें बंद करा दी गई और कई दुकानें तो लोगों के विरोध के कारण खुली ही नहीं,इन दुकानों के बाहर लोग कई महिनों से धरना देकर बैठे हैं । 

Posted By: Preeti jha

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