धर्मबीर सिंह मल्हार, धुन्न ढाए वाला (तरनतारन ) : संसार की 8 बेमिसाल लड़ाइयों में एक सारागढ़ी की लड़ाई को देश के लोग कभी नहीं भूल सकते। इस लड़ाई में 21 सिखों ने बहादुरी के साथ 600 से अधिक कबायलियों को मार गिराया था। 12 सितंबर 1897 को हुई इस लड़ाई के महान शहीदों में लाल सिंह का नाम भी है। महान शहीद लाल सिंह जिला तरनतारन के गांव धुन्न ढाए वाला के निवासी थे। भारतीय फौज के कारनामों में अब तक की सबसे बड़ी लड़ाई मानी जाती सारागढ़ी की लड़ाई में 21 सिख योद्धाओं ने कबायलियों का डटकर मुकाबला कर सारागढ़ी चौकी पर फतेह हासिल की थी। 36 सिख बटालियन के लेफ्टिनेंट कर्नल जाहन हाट्स थे। सारागढ़ी चौकी की कमांड हवलदार ईशर सिंह के हाथ में थी। चौकी के सिग्नल टावर पर सिपाही गुरमुख सिंह तैनात थे। बताया जाता है कि उस समय इलाके के कबायली लोग अकसर फौज के लिए आने वाले सामान को लूट लिया करते थे। सारागढ़ी की चौकी कबायली तबाह करना चाहते थे। 12 सितंबर 1897 को कबायलियों ने चौकी को घेर लिया। कबायलियों के नेता ने चौकी में तैनात फौजियों को हथियार फेंकने लिए कहा। इस दौरान सारागढ़ी चौंकी के कमांडर हवलदार ईशर सिंह की अगुवाई में जवानों ने लड़ाई का नगाड़ा बजा दिया। इतिहास की मानें तो 21 सिख जवानों ने 600 से अधिक कबायलियों को ढेर कर दिया था। सारागढ़ी के शहीदों की बहादुरी की कहानी इंग्लैंड, फ्रांस के स्कूलों में अभी भी बच्चों को पढ़ाई जाती है। इस लड़ाई के महान शहीद लाल सिंह गांव धुन्न ढाए वाला के निवासी थे। लाल सिंह की पत्नी व बेटी की उस समय पाक में 2 मुरबे जमीन मिली थी। देश के बंटवारे के बाद उनके परिवार को जिला जालंधर के कस्बा नकोदर में जगह अलाट की गई। लाल सिंह की बेटी व पत्नी की मौत के बाद उनका वंश अभी भी नकोदर में रहता है। गांव निवासियों ने सारागढ़ी लड़ाई के शहीद लाल सिंह की यादगार गांव में बनाई है। यहां पर हर वर्ष 13 सितंबर को श्रद्धांजलि समागम होता है। यादगार कमेटी के अध्यक्ष शूबेग सिंह धुन्न ने बताया कि खडूर साहिब के विधायक रमनजीत सिंह सिक्की ने यादगार के पास शेड बनाने लिए पौने 2 लाख की राशि जारी की थी। 13 सितंबर को यहां पर श्री अखंड पाठ साहिब जी के भोग डाले जाएंगे। इसके बाद यहां पर श्रद्धाजंलि समागम होगा। समागम में विधायक रमनजीत सिंह सिक्की के अलावा कई शख्सियतें सारागढ़ी लड़ाई के शहीदों को नमन करेंगी।

Posted By: Jagran

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