धर्मबीर सिंह मल्हार, तरनतारन : गरीब व जरूरतमंद परिवारों की सुध लेने में आशा फाउंडेशन सबसे आगे है। तीन वर्ष पहले शहर के व्यापारी परिवार के सदस्य सूरज कुमार ने जरूरतमंदों की मदद के लिए आशा फाउंडेशन संस्था का गठन किया था। उस समय संस्था में 21 परिवार थे, जिनका ग्राफ अब बढ़कर 46 तक पहुंच गया है।

शहर के प्रसिद्ध कपड़ा व्यापारी मनोज कुमार टिम्मा के लड़के सूरज शर्मा को शुरू से चाहते थे कि जरूरतमंद लोगों की किसी बहाने मदद की जाए। पुत्र के इस शौंक को पूरा करने में पिता ने अपना फर्ज समझते हुए आशा फाउंडेशन का गठन किया। उस समय 21 परिवारों ने संकल्प लिया कि यह फाउंडेशन मानवता की सेवा को समर्पित होगी।

गुरु नगरी तरनतारन के एक दर्जन ऐसे परिवारों का चयन किया गया, जिनके मुखियों की मौत हो गई थी। आशा फाउंडेशन द्वारा 100 से अधिक विधवा महिलाओं को अपनी योजना के साथ जोड़कर उनको समय-समय पर राशन वितरण किया जा रहा है।

किताबें, फीस व ट्राई साइकिल भी देती है फाउडेशन

विधवा महिलाओं की बेटियों की शादी के समय आशा फाउंडेशन की ओर से दो वर्ष के दौरान करीब 20 लड़कियों को पढ़ाई लिए किताबें, फीस, यूनिफॉर्म मुहैया करवा चुकी है। जबकि 70 के करीब विधवा महिलाओं को सिलाई मशीन देने और दिलाने में अहम भूमिका निभाई जा चुकी है। ऐसे परिवारों से जुड़े दिव्यांग बच्चों को 17 ट्राई साइकिल दिए गए हैं। 100 के करीब विधवा महिलाओं की पेंशन लगवाने के अलावा उनके नीले कार्ड बनाने लिए आशा फाउंडेशन के सदस्य अपनी भूमिका निभा चुके हैं।

बच्चों के जन्मदिन पर होता है खास मौका

आशा फाउंडेशन के अध्यक्ष सूरज शर्मा ने बताया कि कार्यकारणी कमेटी के सदस्यों द्वारा अपनी शादी की वर्षगांठ व बच्चों के जन्मदिन के मौके किए जाने वाले खर्च से कुछ राशि निकालकर विधवा महिलाओं को दिए जाने वाले राशन के बदले भुगतान कर दिया जाता है। फाउंडेशन द्वारा किसी भी सूरत में शहर या किसी सियासी नेता से उगराही नहीं ली जाती। यहां तक कि बीमारी से जूझ रहे लोगों के इलाज लिए दवाइयां खरीदकर देने के साथ उनको राशन भी मुहैया करवाया जाता है। यह लोग हर महीनें निकालते हैं कमाई का दसवंध

आशा फाउंडेशन के कार्यकारणी मेंबर दिनेश जोशी, राजन गुप्ता, अमृतपाल सिंह, राकेशपाल धवन, मंगलदीप सिंह, मनोज कुमार, तरलोक सिंह, इंद्र ठाकुर, अभिषेक शर्मा, सलिन दवेसर, जतिन चावला, अमन अरोड़ा, प्रिंस गुलाटी, लवप्रीत सिंह, संजीव शर्मा, बिक्रम सिंह बबलू ने पिछले छह माह के दौरान अपनी कमाई से सबसे अधिक दसवंध निकालकर विधवा महिलाओं को राशन खरीदकर देने में खर्च किया है।

Posted By: Jagran

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