जागरण संवाददाता, तरनतारन : दिसंबर 2018 को हुए पंचायत चुनाव के दौरान विधानसभा हलका पट्टी के गांव नौशहरा पन्नुआं से तरसेम सिंह को निर्विरोध विजेता घोषित किया गया था। वहीं रंजीत सिंह बादल के नामांकन-पत्र रद कर दिए गए थे। इस मामले में एसडीएम-कम-चुनाव ट्रिब्यूनल की ओर से हाई कोर्ट के निर्देशानुसार की गई जांच में इस चुनाव को गैर-कानूनी करार देते हुए दोबारा चुनाव कराने के लिए आदेश जारी किए गए हैं।

तरसेम सिह पूर्व कांग्रेस विधायक हरमिदर सिंह गिल के करीबी हैं। तरसेम सिंह के मुकाबले रंजीत सिंह बादल ने अपने नामांकन-पत्र भरे थे। इनकी जांच के दौरान ब्लाक नौशहरा पन्नुआं के रिटर्निंग अधिकारी द्वारा यह कहते हुए नामांकन-पत्र रद कर दिए गए थे कि उनकी ओर हाउस टैक्स का बकाया है जबकि रंजीत ने सारे टैक्स अदा करने के बाद एनओसी भी प्राप्त कर ली थी। रंजीत ने हाई कोर्ट में 24 दिसंबर 2018 को रिट पटीशन दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने जिले के डीसी को आदेश दिया था कि शिकायतकर्ता की नामजदगी फाइल की दोबारा जांच की जाए। डीसी ने यह मामला तरनतारन के एसडीएम-कम-चुनाव ट्रिब्यूनल (रजनीश अरोड़ा) को सौंप दिया। उहोंने मामले की जांच में पाया कि सरपंच तरसेम ने पंचायती जमीन पर रहित कब्जा करके बकायदा अपना मकान बनाया हुआ है, जिसके खिलाफ पंचायत द्वारा प्रस्ताव भी पारित किया गया था। इस पर पंचायत सचिव और बीडीपीओ के हस्ताक्षर भी हैं। इसके बावजूद बीडीपीओ और पंचायत सचिव ने तरसेम को एनओसी जारी की थी। एसडीएम-कम-चुनाव ट्रिब्यूनल ने अपना फैसला सुनाते हुए सरपंच तरसेम की सरपंची को गैरकानूनी करार देते हुए नौशहरा पन्नुआं के सरपंच के लिए दोबारा चुनाव करवाने का आदेश जारी किया है। ट्रिब्यूनल ने पंचायती लोकतंत्र को बहाल किया: रंजीत

रंजीत सिंह बादल की अगुआई में शुक्रवार को नौशहरा पन्नुआं में बैठक की गई। इसमें ब्लाक समिति मेंबर राजकरण सूद, पूर्व सरपंच इकबाल सिंह मैणी, बलकार सिंह पन्नू, तेजिदरपाल सिंह आदि ने कहा कि सियासी दखलअंदाजी के चलते तरसेम द्वारा सरपंच के पद पर काबिज होकर लोकतंत्र का गला घोंटा गया था। रंजीत ने कहा कि चुनाव ट्रिब्यूनल ने सही फैसला लेते हुए पंचायती लोकतंत्र को बहाल किया है।

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