जासं, तरनतारन : सोशल डिस्टेंसिंग जितनी जरूरी है उतना ही जरूरी अखबार पढ़ना है। क्योंकि सोशल मीडिया पर आए दिन अफवाहें फैलती हैं, परंतु अखबार ही ऐसा साधन है जो स्टीक खबरों का जरिया है। अखबार पढ़ने से न तो कोरोना वायरस फैलता है और न ही कोई ऐसी दहशत पैदा होती है जो देश और समाज लिए खतरा हो। यह कहना है विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों, विधायकों व शख्शियतों का।

कोट्स

डीसी प्रदीप सभ्रवाल कहते है कि कोरोना वायरस के मद्देनजर जिले के लोग क‌र्फ्यू का सामना कर रहे हैं। घरों में बैठकर टीवी देखने के साथ अगर अखबार पढ़ा जाए तो देश दुनिया का पूरा हाल जाना जा सकता है। एसएसपी ध्रुव दहिया कहते है कि अखबारें पढ़ने से अकसर एनर्जी मिलती है और देश दुनिया का हाल जानने को मिलता है। अखबार के माध्यम से हम खेल, मनोरंजन पर भी फोकस कर सकते है। विधायक डॉ. धर्मबीर अग्निहोत्री कहते है कि देश और समाज पर जब कोई आपदा आती है तो अखबारों ने हमेशा अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है। कोरोना वायरस के मद्देनजर अफवाहों से बचने के लिए अखबारों पर ही विश्वास किया जा सकता है। सेहत व परिवार भलाई विभाग के पूर्व डायरेक्टर डॉ. करनजीत सिंह कहते है कि लोगों को इस अफवाह से बचना चाहिए कि अखबारों से कोरोना का डर है। वैसे भी रूटीन में अखबार पढ़ने के बाद हाथ धो लिए जाए तो कोई हर्ज नहीं। सिविल सर्जन डॉ. अनूप कुमार कहते है कि कोरोना के मद्देनजर प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। वह अपना हर मैसेज लोगों तक पहुंचाने लिए अखबार को ही सटीक मानते है। लोगों को भी चाहिए कि अखबारों पर भरोसा करते रहें। जिला शिक्षा अधिकारी सतनाम सिंह बाठ कहते है कि देश में भले ही कोरोना वायरस का खतरा है। परंतु अखबारों से अच्छी जानकारी प्राप्त होती है। अखबार ही एक ऐसा माध्यम है जो देश और समाज की प्रगति बाबत लोगों को अवगत करवाता है। एसपी (आइ) जगजीत सिंह वालिया कहते है कि अखबारों की भूमिका पर संदेह जिताना ठीक नहीं होता। सोशल मीडिया पर भले ही कई अफवाहें फैलती है, परंतु अखबारें अपनी जिम्मेदारी अच्छे ढंग से निभाकर समाज को जागरूक करती हैं। डीएसपी सुच्चा सिंह बल्ल कहते है कि अखबारों के माध्यम से हम आपसी दूरी मिटा सकते हैं। अखबार हमारे देश और समाज के प्रति जवाबदेह होती है। इसीलिए अखबारों की भूमिका समाज को सचाई का आइना दिखाती है। एसएमओ डॉ. इंद्रमोहन गुप्ता कहते हैं कि सुबह का अखबार न पढ़ा जाए तो ऐसा लगता है कि जैसे सवेर नहीं हुई। अखबारों के माध्यम से सच्ची जानकारी, सामाजिक गतिविधि से अवगत होना लाजमी है। मनोरोगों की माहिर डॉ. ईशा धवन कहती हैं कि देश और दुनिया के हाल को जानने लिए हम लोग अखबार पर भरोसा करते हैं, क्योंकि हमें पता है कि हमारा भरोसा कभी टूटने वाला नहीं। घरों में वक्त गुजारने लिए अखबार पढ़ने में कोई हर्ज नहीं।

Posted By: Jagran

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