जागरण संवाददाता, तरनतारन : हाड़ माह की अमावस्या के संबंध में दो दिवसीय जोड़ मेला श्री दरबार साहिब में बुधवार की शाम को समाप्त हो गया। श्री दरबार साहिब के हेड ग्रंथी भाई सतपाल सिंह, मैनेजर धरविदर सिंह मानोचाहल व धार्मिक शख्सियतों ने दो दिवसीय जोड़ मेले दौरान संगतों को गुरबाणी यश से निहाल करने वाले ढाडी, कविशरी और कथावाचक जत्थों को सिरोपा देकर सम्मानित किया।

सिखों के पांचवें गुरु और शहीदों के सरताज श्री गुरु अर्जन देव जी की ओर से तरनतारन नगर बसाया। उन्होंने यहां पर श्री दरबार साहिब का निर्माण करवाया गया था, जिसके साथ गुरु जी ने पावन दुख निवारण सरोवर का निर्माण करवाया।

श्री गुरु अर्जन देव जी द्वारा पावन दुख निवारण सरोवर के निर्माण कार्य शुरू करने के संबंध में भादों के महीने में पहला जोड़ मेला लगता है। जबकि पावन सरोवर की सेवा मुकम्मल होने के संबंध में चैत में अमावस्या को दूसरा मेला लगता है। हालांकि गुरु जी के आशीर्वाद से श्री दरबार साहिब में हर माह चौदस और अमावस्या को देश-विदेश से संगत यहां शीश नवाने आती है। श्री दरबार साहिब के मैनेजर धरविदर सिंह मानोचाहल ने बताया कि अमावस्या के जोड़ मेले के संबंध में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से संगत की आमद के मद्देनजर गुरु के लंगर, ठंडे मीठे जल की छबीलें और रिहायश के पुख्ता प्रबंध किए गए। श्री दरबार साहिब में अमावस्या मौके मनिदर सिंह, सुखवंत सिंह धामी, मास्टर कुलविदर सिंह लवली, नरिदर सिंह बैंक वालों ने ठंडे मीठे जल की छबीलों पर सेवा की।

बाबा लखबीर सिंह ने बताया पुरातन इतिहास

मंगलवार की रात को चौदस के संबंध में दीवान हाल में पूरी रात धार्मिक दीवान लगाए गए। एसजीपीसी के प्रचारक भाई लखबीर सिंह कक्का कंडियाला ने संगतों को तरनतारन नगर बसाने, पावन सरोवर की तामील करवाने, मीनार के निर्माण में महाराजा रणजीत सिंह के पोते कुंवर नौनिहाल सिंह से निभाई सेवा से लेकर श्री दरबार साहिब से संबंधित पुरातन बुंगों से संगतों को अवगत करवाया। नमक और झाड़ू से होते है रोग दूर

मान्यता है कि श्री गुरु अर्जन देव जी की ओर से यहां बनाए गए पावन दुख निवारण सरोवर में चर्म रोग दूर होते है। गुरु जी के आशीर्वाद के अनुसार पांच अमावस्या को स्नान करने और श्री दरबार साहिब में नमक और झाड़ू चढ़ाने से मानवीय शरीर में उकरने वाले मोके (चमड़ी रोग) से निजात मिलती है।

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