संगरूर [मनदीप कुमार]। घर गृहस्थी में पति के साथ अगर पत्नी भी कदम से कदम मिलाकर चले तो कामयाबी कदम चूमती है। संगरूर की कुलदीप कौर ने सच कर दिखाया है। संगरूर की कुलदीप कौर जहां अपना घर चलाने के लिए 18 टायरों वाला ट्राला चलाती हैं, वहीं घरेलू व पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभा रही हैं। कुलदीप कौर अपने पति के साथ ट्राला चलाती हैं। वह पति केे साथ कोलकाता से लेकर नेपाल तक का सफर कर चुकी हैंं। ट्राला लेकर रोज कहीं न कहीं सड़कों पर उतरती हैं। कुलदीप अपने पति लक्खा सिंह के साथ ही जाती हैं।

बकौल कुलदीप कौर, "मैं अपने पति के साथ उनकी मदद करने के लिए जाती थी। एक दिन मेरा मन हुआ कि मैं भी ट्राला चलाऊं। पति ने मेरी इच्छा देख मुझे ट्राला चलाना सिखाने के लिए हां कर दी। मन में जोश और जज्बा था, इसलिए मैंने जल्द ट्राला चलाना सीख लिया। इसके बाद मैं मुंबई, नेपाल व गुजरात ट्राला चलाकर जाने लगीं।"

परिवार वालों ने तो घर से निकाल दिया था

कुलदीप कौर ने बताया कि उनके घरवालों को उनका ट्राला चलाना रास नहीं आया। उन्हें इस पर आपत्ति थी। हर कोई यही कहता था कि एक महिला के लिए यह काम करना ठीक नहीं है। परिवार वालों ने तो हमें यह कहकर घर से निकाल दिया था कि वह गलत काम करती है।

कुलदीप कौर ने कहा कि उनके पति ने उनका हमेशा साथ दिया। यही वजह है कि आज वह अपने हुनर के बल अपना खुद का ट्राला सकी हैं। कुलदीप कहती हैं कि मैंने हर मुश्किल का सामना किया। पति के सहयोग और अपने बलबूते मैं एक कामयाब ट्रक ड्राइवर बनी। वह घर का भी सारा काम करती हैं। उनका एक बेटा है, जिसे वह पढ़ा रही हैं।

पहाड़ी इलाके में ट्राला चलाने का है हुनर

सड़कों पर गाड़ी व ट्राला चलाना बेशक आसान दिखाई देता है, लेकिन पहाड़ी इलाके में ट्रक-ट्राला चलाना आसान नहीं है। अच्छे-अच्छे ड्राइवरों के पहाड़ी इलाके में पसीने छूट जाते हैं, लेकिन कुलदीप हिमाचल की पहाड़ियों में भी कुशलता के साथ ट्राला दौड़ाती हैं। कुलदीप ने कहा कि हिमाचल में पानी का ट्राला लेकर जाने पर  राज्यपाल की ओर से वर्ष 2018 में उन्हें प्रशंसा पत्र मिला था। वह कहती हैं, "मुझे दुख भी है कि आज तक पंजाब सरकार ने उनके हुनर की प्रशंसा नहीं की।" कुलदीप ने कहा कि औरतों को पीछे नहीं हटना चाहिए। जमाना कुछ भी कहे, बस आगे बढ़तेे रहना चाहिए।

कुलदीप ने ट्राला चलाना सिखाने को कहा तो हैरान रह गया था : लक्खा

पति लक्खा सिंह ने बताया कि जब पहली बार कुलदीप ने ट्राला चलाना सिखाने को कहा तो वह हैरान रह गया था। उन्हें अजीब लगा था मगर उसे ट्राला चलाने से कभी नहीं रोका। कुलदीप को ट्राला चलाना सिखाया। आज वह दोनों नेपाल, मुंबई, गुजरात तक ट्राला इकट्ठे ही चलाते हैं। उन्हें खुशी भी है कि कुलदीप को हिमाचल सरकार ने प्रशंसा पत्र दिया है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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