जेएनएन, संगरूर। पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए जहां किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा हैं, वहीं उन्हें विशेष व बेहतर सुविधाएं भी दी जा रही हैं। इसी कड़ी में संगरूर में अब किसानों को वीवीआइपी ट्रीटमेंट दिया जाने लगा है। जिला प्रशासन ने पराली को आग न लगाने वाले 66 किसानों को वीआइपी कार्ड बनाकर दिए हैं।

इस कार्ड के साथ किसानों को सरकारी कार्यालयों में भटकना नहीं पड़ेगा। सभी जगह पहल के आधार पर उनके काम होंगे। प्रशासन का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक किसान उनको देखकर जागरूक हों। डिप्टी कमिश्नर घनश्याम थोरी ने संगरूर के जिला प्रबंधकीय कांप्लेक्स में एक समागम के दौरान पराली न जलाने वाले 66 किसानों को कार्ड देकर इस मुहिम की शुरुआत की।

...ताकि जागरूक किसानों को समाज में बनता सम्मान मिले

डीसी ने बताया कि सीटू सीआरएम स्कीम के तहत यह कार्ड दिए गए हैं। कार्ड की वैधता एक साल के लिए होगी। भविष्य में पराली नहीं जलाने वाले किसानों को नए वर्ष में फिर से कार्ड बनाकर दिए जाएंगे। कार्ड जारी करने का उद्देश्य सिर्फ किसानों को समाज में बनता सम्मान देना है। कार्डधारक किसानों को सरकारी सेवाएं पहल के आधार पर दी जाएंगी और सरकारी कार्यालयों में इन्हें पूरा मान सम्मान दिया जाएगा।

जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ी

वीआइपी बने किसान हरविंदर सिंह, प्रीतम सिंह, कुलदीप शर्मा व अन्य ने कहा कि पराली न जलाने से जमीन की उपजाऊ शक्ति में बढ़ोतरी हुई है। वह दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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