जेएनएन, लहरागागा (संगरूर) :

जगमेल हत्याकांड की जांच करने के लिए पहुंचे राष्ट्रीय एससी आयोग के चेयरमैन डॉ. रामशंकर, उपचेयरमैन डॉ. एल मुरुगण, डॉ योगेश पवन के समक्ष उस समय बेहद गहमागहमी का माहौल बन गया, जब आयोग की टीम ने गांव की सरपंच जसविदर कौर से मामले की जानकारी लेने के लिए बातचीत की। बातचीत दौरान महिला सरपंच ने कहा कि जगमेल सिंह व आरोपितों के बीच अक्सर ही झगड़ा होता रहता था, जिस दिन यह मारपीट हुई, उस दिन वह गांव से बाहर थे। उनकी यह बात सुनते ही ग्रामीण तरसेम कुमार ने सरपंच की बात काटते हुए कहा कि पंचों व सरपंच की गांव में मौजूदगी के समय पर जगमेल सिंह से मारपीट की गई, लेकिन किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की।

अवतार सिंह पुत्र बलवंत सिंह ने कहा कि सात नवंबर की घटना के तुरंत बाद ही पीड़ित द्वारा पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करनी तो दूर पुलिस गांव में भी जांच करने के लिए नहीं पहुंचे। जबकि पुलिस ने पिछले झगड़े के समय भी कार्रवाई करने की बजाए, मामले की समझौता करवाने को दबाव बनाया। एससी आयोग के चेयरमैन डा. राम शंकर ने तुरंत एसएसपी से पूछा कि क्या पुलिस के पास कोई शिकायत पहुंचा तो एसएसपी ने पता करके बताने की बात कह दी। साथ ही जगमेल सिंह के बड़े भाईको भी आयोग के समक्ष पेश किया तथा कहा कि आरोपित रिकू के परिवार ने जगमेल के बड़े भाई की बाजुओं को तोड़कर अपाहिज कर दिया। इस मामले की भी पुलिस ने गंभीरता से पड़ताल करके आरोपितों को सख्त सजा नहीं दिलाई, जिस कारण आरोपितों ने अब जगमेल को मौत के घाट उतार दिया। आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए भाई की बाजुओं को तोड़ने के मामले की जांच के भी तुरंत आदेश जारी किए।

जांच करने आई टीम ने इस हत्याकांड के घटित होने के कारण, जगमेल की टांगें काटने की जरूर क्यों पड़ी, पुलिस इंस्पेक्टर ने तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं की, सेहत विभाग जवाब दे की पिटाई से कारण टांगें क्यों काटनी पड़ी और टांगें काटने के बाद मौत क्यों हुई का जवाब दें। कमीशन ने इस घटनाक्रम में पुलिस, सेहत विभाग की घोर लापरवाही बताई।

Posted By: Jagran

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