सुखदेव पवार, संगरूर

मिट्टी से बनी कच्ची स्टेज, गिनती के कलाकार, इक्का-दुक्का पोशाकें, न लाइटों का पर्याप्त प्रबंध और न ही कोई साउंड सिस्टम कुछ ऐसे ही दौर में वर्ष 1929 में संगरूर के बग्घीखाना में रामलीला के मंचन का दौर आरंभ हुआ। यहां रामलीला के आरंभ होने का इतिहास भी काफी दिलचस्प है। संगरूर के सेठ शिव हरे के पुत्र रामलीला का मंचन देखने का काफी शौकीन थे, लेकिन संगरूर में रामलीला का मंचन नहीं होने के कारण वह रामलीला देखने के लिए संगरूर से लाहौर जाते थे। दस दिन की रामलीला की बजाए उसे मात्र एक या दो दिन की ही रामलीला लाहौर जाकर देखने का मौका मिलता था। अपने बेटे के रामलीला देखने की रुचि को पूरा करने के लिए सेठ शिव हरे ने बग्घीखाना में रामलीला के मंचन की शुरूआत की तथा रामलीला के संस्थापक बने। उस समय आधुनिक सुविधाओं का दौर बेशक दौर नहीं था, लेकिन कलाकारों का जोश काबिले तारीफ है, जो आज भी बरकरार है। यहां रामलीला देखने आसपास के गांवों से भी लोग आते हैं। रामलीला में महिलाओं की भूमिका थियेटर से जुड़ी लड़कियां की करती हैं, इसी लिए रामलीला के हर किरदार की अदाकारी बेहतरीन है। अब पांच मंच पर होती है रामलीला

रामलीला के चीफ डायरेक्टर यशपाल ने बताया कि समय के साथ संस्था भी समृद्ध होती गई, पहले जहां लोग बैठने के लिए अपनी चटाई, कड़ी की सेटी या बैठने की कोई भी सामग्री साथ लेकर आते थे व जमीन पर बैठकर रामलीला देखते थे। आज श्री राम की कृपा से पांच स्टेज स्थापित हैं तथा बैठने के लिए कुर्सियां का प्रबंध किया गया है।

चार पीढि़यां रोल निभा रहे है फत्ता परिवार

तीस वर्षो से रामलीला में अभिनय कर रहे एडवोकेट सुमीर फत्ता ने बताया कि उनका परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी रामलीला में विभिन्न प्रकार के अभिनय निभाता आ रहा है। उनके दादा रामदास फत्ता, पिता सतिदर भत्ता 60 वर्ष तक रामलीला के मंच किरदार निभाते रहे हैं। पिता के साथ वह भी किरदार निभाने में जुटे और अब तीस वर्ष से वह किरदार निभा रहे हैं। अब उनका पुत्र सिद्धार्थ फत्ता भी मंच पर कलाकारी करने लगा है। रामलीला के सबसे पुरान कलाकारों में से जवाहर गोयल 50 वर्षों से, धनेश शर्मा 50 वर्षों से, सतिदर फत्ता 60 वर्षों से, चीफ डायरेक्टर यशपाल जी 45 वर्षों से रामलीला से जुड़े हुए हैं। उनके द्वारा राम चरित्र मानस, राधे श्याम की रामायण, जसवंत सिंह की रामायण के आधार पर ही राम लीला खेलते हैं। प्रेम कुमार, केके मोदगिल, वीके गोयल, जवाहर गोयल, तरसेम लाल, जतिदर फत्ता, सुमीर फत्ता उनकी स्टेज के सबसे पुराने कलाकार हैं जो वर्षों से राम लीला से जुड़े हुए हैं। अब हाईटेक हो गई हैं रामलीला

पहले की रामलीला व अब की रामलीला में काफी बदलाव आ गए हैं। अब ढाचा काफी मजबूत हुआ है। पहले कच्ची स्टेज होती थी, स्टोर भी पक्के हो गए हैं। लाइटिंग सिस्टम, साउंड, बैठने के प्रबंध, आधुनिक पर्दे, आधुनिक मेकअप, ड्रेसेज सब कुछ बदल गया है। रामलीला के खर्चे के बारे में उन्होंने बताया कि पहले के समय में 200-300 रुपये में रामलीला हो जाती थी, मगर अब उनका रामलीला का बजट पौने आठ लाख रुपये है।

Posted By: Jagran

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