संवाद सहयोगी, संगरूर : साइंटिफिक अवेयरनेस एंड सोशल वेल्फेयर फोरम के प्रधान डॉ. एएस मान ने सरकार को स्कूल व कॉलेज खोलने की मांग करते हुए कहा कि सबसे अधिक केस शहरों में देखने को मिल रहे हैं। गांव में कोरोना केस नाममात्र हैं। अध्यापकों का भी कोरोना टेस्ट करवाना चाहिए। अगर वह पॉजिटिव आ जाता है तो उसे चौदह दिनों के लिए क्वारंटीन कर दिया जाता है। कोरोना की आड़ में शिक्षा का नुकसान किया जा रहा है। स्कूल खुलने की सूरत में सरकार को चाहिए कि वह प्रत्येक स्कूल में इंफ्रारेड थर्मामीटर रखे, कक्षा रूम के बाहर हाथ धोने हेतु साबुन व सैनेटाइजर रखा हो, अध्यापक व छात्र के पास मॉस्क का प्रबंध किया जाए। 21 से 30 सितंबर तक टीचिग व नॉन टीचिग स्टाफ आकर स्कूल को सेट कर सकते हैं व उसके बाद एक अक्टूबर से 9वीं व 12वीं तक की कक्षाएं आसानी से लगाई जा सकती हैं। अगर हालात सही रहे तो उसके बाद 15 अक्टूबर से 6वीं से 8 वीं की कक्षाएं शुरु कर दी जाए, स्थिति ठीक होने पर एक नवंबर से सभी स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटयों को खोल दिया जाए। उन्होंने कहा कि परिजन ऑनलाइन पढ़ाई से तंग आ चुके हैं। माता-पिता को घर पर कई काम होते हैं। ऐसे में अपना काम छोड़कर उन्हें बच्चों को पढ़ाई करवाना पड़ता है। बहुत से परिजन ऐसे हैं, जिन्हें इंग्लिश नहीं आती, वह ऑनलाइन चल रही अध्यापक की बात समझ नहीं पाते, इसलिए स्कूल खोलना बेहद जरूरी है। मौके पर बलदेव सिंह गोसल, सुरिदपाल कौर, संतोख कौर, अनिल गोयल, अमरीक गागा, गुरहाकम सिंह, जसविदर कुमार आदि उपस्थित थे।

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