जागरण संवाददाता, संगरूर : गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी को केंद्र के दायरे में लाने के लिए साजिश के तहत केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाने की कोशिश की जा रही है, जबकि केंद्र पहले ही पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला पर कब्जा कर चुका है। यह विचार केंद्रीय लेखक सभा सेखों के प्रधान डॉ. तेजवंत मान द्वारा व्यक्त किए गए। उन्होंने कहा कि पंजाबी भाषा को खत्म करने के प्रयास पहले से ही हो रहे हैं। यह यूनिवर्सिटी गुरु नानक देव जी के नाम पर बनी होने के कारण लोगों की धार्मिक भावनाएं भी इससे जुड़ी हुई हैं, लेकिन कुछ अध्यापक अपने वेतन व अन्य फायदों के लिए केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाने की मांग का समर्थन करते नजर आ रहे हैं, जोकि बेहद शर्मनाक है। ऐसा कर वह राज्य के लोगों के हितों से धोखा कर रहे हैं। इस मौके पर सभा सदस्यों डा. जोगिदर सिंह निराला, संधू वरियाणवी, डा. भगवंत सिंह, पवन हरचंदपुरी, नवराही घुगिआणवी, रविदर भट्ठल, जगीर सिंह जगतार, डॉ. अरविदर कौर काकड़ा, डॉ. नरविदर कौशल, जगराज धौला, गुलजार सिंह शौंकी, डॉ. स्वराज सिंह, भूपिदर जगराओं आदि सदस्यों ने केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाने की कारवाई को बंद करने की मांग की है।

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