जेएनएन, बेनड़ा (संगरूर) : स्थानीय शुगर मिल में उस समय किसानों व शुगर मिल मध्य अदायगी का झगड़ा फिर गर्मा गया, जब शुगर मिल के बायालर की छत पर फिर चार किसान अदायगी लेने के लिए चढ़ गए, साथ ही नीचे किसानों की तरफ से धरना शुरू कर दिया गया। चारों किसानों ने बायलर की छत पर भूख हड़ताल आरंभ कर दी है।

गौर हो कि 11 अक्टूबर को प्रशासन ने गन्ना काश्तकारों के साथ शूगर मिल का समझौता करवाते बकाया साढ़े 5.88 करोड़ रुपये की रकम को 21 अक्टूबर तक किसानों के खातों में डालने का वादा करवाया था, परन्तु 21 अक्टूबर निकलने के बाद किसानों के खातों में राशि जमा न होने के चलते मंगलवार को किसानों ने फिर से संघर्ष आरंभ कर दिया।

किसान नेता हरजीत सिंह बुगरा, भवन सिंह कहेरू, बहादर सिंह ईसड़ा व निर्भय सिंह बाजवा शुगर मिल के बायलर की छत पर चढ़ गए। धरनाकारी हरजीत सिंह गुगरा पूर्व चेयरमैन ने बातचीत करते हुए बताया कि अब किसानों का शुगर मिल से विश्वास उठ चुका है व अब वह शुगर मिल व प्रशासन के किसी भी भरोसे में नहीं आएंगे। उन्होंने कहा कि बेशक आज शुगर मिल ने किसानों की तरफ से शुरू किए जाने वाले संघर्ष को भांपते ऊंची चिमनी की सीढियां उतार दी थीं, परन्तु आज वह शूगर मिल में स्थित सीढि़यों द्वारा ऊंची छत पर पहुंचने में कामयाब हो गए। उनकी तरफ से अपनी रकम की मांग करते भूख हड़ताल शुरू कर दी गई है व अब किसानों के खातों में रकम ट्रांसफर किए बिना वह धरने से नहीं उतरेंगे।

किसान नेता अवतार सिंह तारी ने कहा कि बेशक शुगर मिल की तरफ से 10 रुपए प्रति ट्राली किसान भलाई फंड के तौर पर काटा जाता है, जिसकी प्रति वर्ष कुल राशि लाखों रुपए बनती है। मिल को गन्ना लेकर आते समय ट्राली पलट जाने, एक्सीडेंट होने, टायर पंचर होने पर किसानों को पेश अन्य समस्याओं के हल के लिए मैनेजमेंट की तरफ से कायम किए भलाई फंड में से पीड़ित किसानों को अपेक्षित राशि अदा करके मौके पर राहत देती है। उन्होंने मांग की कि किसानों से हर वर्ष यह राशि एकत्रित तो की जा रही है, परन्तु भलाई फंड में से आए पैसों का कोई हिसाब-किताब नहीं दिया गया। उन्होंने प्रशासन पर रोष जाहिर करते कहा कि बेशक प्रशासन संघर्ष को समाप्त करवाने के लिए समझौता करवा देता है, परन्तु वह सख्ती से समझौतों को लागू नहीं करवा रहा, जिस कारण अब किसानों का विश्वास मिल व प्रशासन से उठ उठाया है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। शाम तक चारों किसान बायलर की छत पर डटे रहे।

Posted By: Jagran

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