मनदीप कुमार, संगरूर। माचिस की विभिन्न प्रकार की डिब्बियों का संग्रह करने वाले हरबंस लाल को उनके इस शौक ने अलग ही पहचान दिलाई है। हरबंस के पास विभिन्न प्रकार की माचिस की 15 हजार से भी अधिक डिब्बियां हैं। खास बात यह है कि देसी ही नहीं, विदेशी माचिस की डिब्बियां भी उनके संग्रह की शोभा बढ़ा रही हैं। डिब्बियों के साथ-साथ माचिस की तीलियां भी कुछ अलग हैं। एक इंच की मोम से बनी माचिस की तीली से लेकर 11 इंच लंबी माचिस की तीली भी उनके पास है, जिन्हें शायद ही कभी रोजमर्रा की जिंदगी में किसी ने देखा हो।

मार्कफेड में 37 वर्ष तक सरकारी नौकरी के दौरान ही पंजाब के संगरूर निवासी हरबंस लाल को शुरू से ही ऐसी वस्तुएं का संग्रह करने का शौक रहा है। वर्ष 2011 के दौरान फेसबुक पर दोस्तों के साथ तस्वीरें साझा करते समय माचिस की डिब्बियों के संग्रहकर्ता से उनका संपर्क हुआ। यहां से ही हरबंस के दिल में माचिस की डिब्बियां संग्रह करने का शौक पैदा हुआ। इसके बाद वह इन्हें इकट्ठा करने में जुट गए। खास बात यह है कि उन्होंने आज तक कभी अपने इस संग्रह की प्रदर्शनी नहीं लगाई।

बॉलीवुड, धार्मिक, खेल, परिवहन, जहाज की थीम पर हैं डिब्बियां

हरबंस लाल के पास 50 प्रकार की विभिन्न थीम पर आधारित माचिस की 15 हजार से अधिक डिब्बियां हैं। इनमें पशु-पक्षी, फल, सब्जियां, खेल, धार्मिक, महाभारत, हॉलीवुड और बॉलीवुड सितारों, परिवहन, साउथ इंडियन फिल्मी सितारे, कुंगफू स्टार, इंडियन एयर फोर्स, प्लेन, शिप, कार्टून, लाल मिर्च, होमलाइट सहित विभिन्न कंपनियों की अलग-अलग प्रकार की डिब्बियां शामिल हैं। उन्होंने ये माचिस की डिब्बियां दिल्ली, कोलकत्ता, हिसार, बेंगलुरू, मुंबई सहित दूसरे देशों से भी एकत्रित की हैं। इन्हें जमा करने पर हजारों रुपये भी खर्च किए हैं।

विदेशी होटलों की माचिसें भी हैं खास

माचिसों के इस संग्रह में भारतीय होटल से लेकर विदेशी होटलों की माचिस की डिब्बियों की अपनी खास जगह है। इन डिब्बियों का जहां रंग-रूप हमारे घरों में इस्तेमाल होने वाली माचिसों की डिब्बियों से बिल्कुल अलग है, वहीं ये होटलों की पहचान भी बताती हैं। इनमें मुंबई का होटल ताज, ताज ग्रुप ऑफ होटल्स, लीला होटल, रामी स्वीस्टलाइन होटल दादर, होटल ट्राइजेंट, विवांता होटल, द मेट, ले-मेरिडियन, ओबराय होटल एंड रिसोर्ट, होटल वेलकम बडोदरा, पुलमन होटल, मैक्स दास बिस्ट्रोलाइव, होटल समिथ, होटल पायनियर सिवाक्सी व हांगकांग के मरकेंटाइल बैंक लिमिटेड आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त इराक, नेपाल, अमेरिका, रूस, दुबई, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, साउथ अफ्रीका से संबंधित माचिस की डिब्बियां भी हैं।

लकड़ी व टीन से बनीं डिब्बियां

आजकल आमतौर पर गत्ते से बनी हुई माचिस की डिब्बियां ही देखने को मिलती हैं। बर्फीले इलाके में माचिस की तीलियों को सीलन से बचाने के लिए गत्ते की नहीं, बल्कि लकड़ी, टीन या प्लास्टिक की डिब्बियां बनाई जाती है। इसलिए हरबंस लाल के पास 50 वर्ष पुरानी लकड़ी से बनी विदेशी माचिस की डिब्बी सहित टीन और प्लास्टिक की डिब्बियां भी हैं। इनमें रखी माचिस की तीलियां हमेशा सीलन से बची रहती हैं।

तीलियां भी बेहद खास

इस संग्रह में माचिस ही नहीं, बल्कि माचिस की तीलियां भी खास हैं। एक इंच की मोम से बनी माचिस की तीली से लेकर 11 इंच लंबी माचिस की तीलियां भी इस संग्रह में शामिल हैं। इन तीलियों पर लगा ज्वलनशील मसाला भी अलग है।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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