संवाद सहयोगी, संगरूर : किसान आंदोलन के कारण तकरीबन 54 दिन से बंद रेल सेवा सोमवार को फिर से शुरू हो गई। हालांकि, सोमवार को विभाग ने मात्र मालगाड़ियां ही चलाई थीं। सोमवार को रेलवे स्टेशन पर एक भी मालगाड़ी या यात्री ट्रेन नहीं पहुंची, मगर मंगलवार को रेलवे स्टेशन पर एक मालगाड़ी आई, जबकि यात्री रेलगाड़ी का रूट न होने के कारण कोई यात्री गाड़ी अभी तक संगरूर रेलवे स्टेशन पर नहीं पहुंची। किसान आंदोलन के कारण रेलगाड़ियां बंद थी। 54 दिन बाद ट्रैक पर जिंदगी की छुकछुक लौट आई है और इस कारण कारोबारियों ने भी राहत की सांस ली है। मालगाड़ियां नहीं चलने से कारोबारियों का करोड़ों का माल रुका हुआ था।

उल्लेखनीय है कि एक्सप्रेस गाड़ी को छोड़कर किसी भी यात्री रेलगाड़ी का रूट संगरूर का नहीं है। चलाई गई यात्री रेलगाड़ियों में से मंगलवार को किसी गाड़ी का रूट न होने के कारण रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा ही पसरा रहा, लेकिन रेलगाड़ियों में बुकिग चालू होने पर टिकट खिड़की पर कुछ यात्री बुकिग करते जरूर दिखाई दिए। लंबे समय के बाद टिकट खिड़की पर दोबारा रौनक दिखाई दे रही है। रेलवे स्टेशन अधिकारी ने बताया कि विभाग द्वारा जो एक्सप्रेस गाड़ियां चलाई गई हैं, उनमें से किसी का भी संगरूर का रूट नहीं है। उन्होंने बताया कि एक्सप्रेस रेलगाड़ियों में से कटड़ा से जबलपुर व कटड़ा से कोटा रेलगाड़ियां ही चलाई गई हैं। इन दोनों गाड़ियों के जिले में रविवार व बुधवार को रूट हैं। कोविड-19 के कारण अभी बाकी की यात्री रेलगाड़ियों पर रोक बरकरार ही है। सुबह से लेकर रात तक मात्र 20 से 25 यात्री बुकिग करने पहुंच रहे हैं। मंगलवार को दोपहर तक एक मालगाड़ी ही रेलवे स्टेशन पर पहुंची थी। सभी पटों पर रेल चलाने संबंधी तैयारियों चलती ही रहती हैं। प्रतिदिन पटों की जांच की जाती है कि कहीं से कोई नट वगैरा ढीला तो नहीं। इसके अलावा प्रतिदिन की चेकिग जारी ही रहती है।

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