जागरण संवाददाता, रूपनगर

आइआइटी रूपनगर ने अपने 466.69 एकड़ में फैले नए कैंपस को जीरो लिक्वड डिस्चार्ज बनाते हुए ईको फ्रेंडली होने का सबूत दिया है। जीरो लिक्वड डिस्चार्ज का खिताब पाने के लिए अपने कैंपस में पानी को एक बार इस्तेमाल करने के बाद उसका दोबारा इस्तेमाल करने व बचाने का बीड़ा उठाया है। इससे आइआइटी आमतौर पर साफ पानी की होने वाली खपत भी बहुत कम हो गई है। वहीं, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले ट्रीट वाटर को आइआइटी में पौधों तथा बागवानी के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। आइआइटी में प्रतिदिन 434 किलो लीटर पानी की रोजाना जरूरत है। इसमें से 210 किलो लीटर पानी रोजाना ट्यूबवेल से तथा बाकी बचने वाला 233 किलो लीटर प्रतिदिन पानी प्रदूषित पानी से रिसाइकिल किया जाएगा, जो आइआइटी में ही पहले इस्तेमाल किया जा चुका है। रोजाना 247 किलो लीटर पानी आइआइटी में वेस्ट बनेगा, जिसको सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से 300 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में ट्रीट किया जाएगा । इसी तरह लेबोरेटरियों में से रोजाना दो किलोलीटर पानी वेस्ट निकलेगा, जिसको 5 किलोलीटर प्रतिदिन क्षमता वाले ईटीपी प्लांट में ट्रीट किया जाएगा। रिसाइकिल किया गया 85 किलोलीटर पानी रोजाना बहाने के उद्देश्य से, 36 किलोलीटर पानी जमीन में ¨सचाई के लिए तथा 112 किलोलीटर पानी एचवीएसी कू¨लग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। बरसाती सीजन में 197 किलोलीटर पानी एचवीएसी कू¨लग तथा फ्ल¨शग संबंधी तथा 36 किलोलीटर प्रतिदिन जमीन में ¨सचाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

नहीं होगी पानी की बर्बादी: प्रो.दास आइआइटी के प्रोफेसर एसके दास ने कहा कि आइआइटी कैंपस में पानी की बर्बादी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि उनकी दूसरी पीढ़ी की आइआइटी जीरो लिक्वड डिस्चार्ज फार्मूला के जरिये तीसरी पीढ़ी आइआइटी के लिए उदाहरण पेश कर चुके हैं। संस्थान के पास फाइव स्टार जीआरआइएचए रे¨टग है।

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