जागरण संवाददाता, नंगल

देश के शहीदों व वीर जवानों को समर्पित शहीद स्वाभिमान यात्रा सोमवार को नंगल पहुंच गई है। गत 23 मार्च को इंडिया गेट से भारतीय थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत के प्रतिनिधि मेजर जनरल अशोक नरुला की ओर से झडी दिखाकर रवाना की गई यात्रा का नंगल पहुंचने पर कारगिल शहीद कैप्टन अमोल कालिया पार्क में भव्य स्वागत किया गया। कारगिल शहीद के स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित करके यात्रा का नेतृत्व कर रहे अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह बिधूड़ी ने बताया कि अब तक यह यात्रा 24 राज्यों में 29 दिन के अंदर 25 हजार किलोमीटर का सफर तय करेगी। अब तक 17 किलोमीटर का सफर 24 राज्यों में 81 दिन के अंदर तय किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इस यात्रा के माध्यम से हर राज्य से मिट्टी लाई जाएगी और विशाल प्रतिमा के साथ ही शहीद स्मारक और शहीद संस्थान की स्थापना भी की जाएगी। जहा आने वाले लोगों को देश के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों के बारे में विशेषज्ञों द्वारा जानकारी भी दी जाएगी। यह संस्थान देश की भावी पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाएगा। उन्होंने बताया कि यात्रा का आयोजन संगठन, धर्म, जाति, वर्ग, देश आदि से ऊपर उठकर केवल राष्ट्र के शहीदों और वीर जवानों को समर्पित है। यह संगठन देश के उन वीर शहीदों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अलख जगाने का काम कर रहा है जिन्होंने देश के शहीदों के प्रति लोगों को जागरूक करना ही अपने जीवन का लक्ष्य बना रखा है। उन्होंने इसी लक्ष्य को सामने रखकर स्वाभिमान देश का संगठन की स्थापना की है।

उन्होंने बताया कि यह यात्रा अब तक राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, आध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड, वेस्ट बंगाल, उत्तर पूर्वी राज्य, बिहार, उत्तर प्रदेश, में अपनी यात्रा को पूरा कर चुका है। इस अवसर पर शहीद कैप्टन अमोल कालिया के पिता सतपाल कालिया, शिव शक्ति मंदिर शिवालिक एवेन्यू के अध्यक्ष पीसी कक्कड़, सीएल कपिल, केएल धालीवाल, जेके दत्ता, एमके अग्निहोत्री, आरएस राणा, डॉ. राकेश चौहान, आरएन शर्मा, एसएचओ पवन चौधरी, डॉ. दर्शन लाल, एमएस जसवाल, सतनाम सिंह सत्ता, आनंद शर्मा, राम मूर्ति शर्मा आदि भी मौजूद थे। य हैं मांगें

यात्रा का नेतृत्व में कर रहे सुरेंद्र सिंह बिधूड़ी ने बताया कि उनके संगठन की मांग है कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह को शहीद का सर्वोच्च सम्मान दिया जाए। राष्ट्र रक्षा के लिए शहीद होने वाले सैनिकों, अर्ध सैनिकों और पुलिसकर्मियों को समान रूप से सम्मान मिलना चाहिए। उनके परिजनों को समान रूप से सारी सुविधाएं दी जानी चाहिए। शहीद परिवारों के लिए शहीद स्वाभिमान कार्ड बनाया जाए, इस कार्ड के माध्यम से शहीद परिवारों को सभी सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिलाया जाए, भारतीय सेना के वेतन को कर मुक्त किया जाए, भारतीय सेना के शहीद परिवारों के लिए अलग से एक आयोग की स्थापना की जाए जहा शहीद परिवारों की सभी समस्याओं का जल्द से जल्द निवारण हो सके। सेवानिवृत्ति के बाद सैनिकों के लिए रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जाए, शहीदों की जयंती और पुण्यतिथि पर राष्ट्रीय स्तर के पारंपरिक खेलकूद, सास्कृतिक एवं देशभक्ति पर आधारित कार्यक्रमों के आयोजन करवाए जाएं, वीर शहीदों की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।

Posted By: Jagran