अरुण कुमार पुरी, रूपनगर

शहर चाहे पानी से लबालब भरी नहरों से घिरा हुआ है, लेकिन शहरवासी लंबे समय से पानी की कमी व सप्लाई हो रहे दूषित पानी को लेकर परेशान हैं। जबकि नगर कौैंसिल भी इस समस्या से लोगों को निजात दिलाने में असफल साबित हुई है।

हालांकि शहर में पिछले 12 साल से नगर कौंसिल पानी की समस्या के समाधान में जुटी हुई है, जिसके तहत शहर में करोड़ों रुपये व्यय करते हुए जहां अंडरग्राउंड पाइपलाइन डाली गई है। जलापूर्ति के लिए चार लाख गैलन की पानी की नई टंकी भी बनाई गई है। जबकि कई माह से वर्टिकल शॉफ्ट का निर्माण किया जा रहा है, ताकि नहर से पर्याप्त पानी उठाते हुए पानी की कमी को पूरा किया जा सके। वर्तमान में वर्टिकल शॉफ्ट ही जी का जंजाल बन चुकी है, क्योंकि इसके निर्माण का जारी काम पूरा होने का नाम ही नहीं ले रहा। दूसरी तरफ जो चार लाख गैलन की टंकी बनाई गई है वो भी फेल साबित हो रही है, क्योंकि इस टंकी से जब पानी की सप्लाई की जाती है तो अंडरग्राउंड पाइपलाइन में लीकेज शुरू हो जाती है, जिससे ज्यादातर मोहल्लों में पानी पहुंच नहीं पाता व जहां पानी पहुंचता है वो पानी पाइपों की लीकेज कारण दूषित हो जाता है।

कौंसिल अध्यक्ष ने अधिकारियों सहित डीसी को बताई थी समस्या

नगर कौंसिल के अध्यक्ष परमजीत सिंह माक्कड़ ने अब अन्य अधिकारियों सहित जहां डीसी के दरबार में दस्तक दे चुके हैं, वहीं ज्ञानी जैल सिंह नगर में सीवरेज एवं वाटर सप्लाई विभाग के दफ्तर के आगे धरना भी लगा चुके हैं। उन्होंने 56 करोड़ से शहर में वाटर सप्लाई व सीवरेज की 100 फीसद व्यवस्था देने के प्रोजेक्ट और राइजिग पाइपलाइन के प्रोजेक्ट की विजिलेंस जांच की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि अफसर इन प्रोजेक्टों में मालामाल हो गए, जबकि शहर पीने के पानी की उपलब्धता और सीवरेज के पानी की ओवरफ्लो की समस्या से जूझ रहा है। बता दें कि जिन दो प्रोजेक्टों की विजिलेंस जांच की मांग अकाली प्रधान व पार्षद कर रहे हैं, दोनों ही प्रोजेक्ट अकाली सरकार के कार्यकाल के हैं।

हाईवे निर्माण के लिए तोड़ी थी वर्टिकल शॉफ्ट, निर्माण जारी

वर्टिकल शॉफ्ट जो 11 साल पहले हाईवे बनाने के लिए तोड़ी गई थी, उसका निर्माण तो जारी है व 30 नवंबर तक पूरा किए जाने का वादा किया जा रहा था, लेकिन आज जब विभाग के एसडीओ अरविदर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कुछ टेक्निकल खामियों के कारण अभी दो माह का समय और लग सकता है। 56 हजार आबादी वाले शहर को पांच क्यूसिक पानी रोज चाहिए, लेकिन वर्टिकल शॉफ्ट न होने की वजह से केवल दो क्यूसिक पानी ही सप्लाई हो रहा है।

क्या कहते हैं लोग -------

शहर को पर्याप्त मात्रा में साफ पानी उपलब्ध करवाना नगर कौंसिल का दायित्व बनता है, जिसके लिए हर शहरवासी टैक्स भी देता है। लेकिन नगर कौंसिल अपने दायित्व को पूरा करने में फेल साबित हो रही है। इसलिए शिअद नेतृत्व वाली कौंसिल को कुर्सी छोड़ देनी चाहिए।

-राजेश कुमार शहर में शिअद की सरकार के कार्यकाल में शत-प्रतिशत साफ पानी की सप्लाई सुनिश्चित बनाने के उद्देश्य से सरकार का 56 करोड़ रुपये खर्च किया गया था। बावजूद इसके अगर ऐसे हालत हैं तो बड़े सवाल खड़े होते हैं। इसकी विजिलेंस जांच करवाई जानी जरूरी है।

-जगदीश काजला

कोट्स

नगर कौंसिल प्रधान परमजीत सिंह माक्कड़ ने कहा कि नगर कौंसिल पानी के मुद्दे को लेकर काफी गंभीर है। उन्होंने कहा कि इस बारे हाउस में बात करने के बाद डीसी के समक्ष सारी रिपोर्ट पेश करते हुए समाधान करवाने की गुहार लगाई जाएगी।

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