रूपनगर, जागरण टीम: सड़कों पर किसी भी वाहन को चलाते वक्त वाहन चालक अगर यातायात नियमों का ईमानदारी से पालन करने लगें तो निश्चित रूप से सड़क हादसों से मुक्ति पाई जा सकती है, लेकिन जल्दबाजी में अकसर वाहन चालक नियमों को तोड़ते हुए अपनी तथा अन्यों की जान को खतरे में डालते देखे जा सकते हैं।

रांग साइड वाहन चलाते होने वाले हादसों की अगर बात करें तो पिछले दो साल के दौरान कुराली-रूपनगर-कीरतपुर साहिब-आनंदपुर साहिब-नंगल हाईवे पर विभिन्न संपर्क सड़कों से चढ़ते हुए लगभग 80 हादसे हुए हैं, जिनमें 32 व्यक्तियों की जान गई, 80 व्यक्ति गंभीर व आंशिक रूप से घायल भी हुए हैं बावजूद इसके रांग साइड वाहनों का चलन आज भी जारी है।

हादसे में किसी की मौत हो जाए या कुछ लोग घायल हो जाएं, तो मरने वाले के साथ साथ घायल होने वाले लोगों के परिवारों को मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान होना पड़ता है तथा रांग साइड से आने वाले वाहन की जिस अन्य वाहन के साथ टक्कर होती है उसे भी बिना गलती खामियाजा भुगतना पड़ता है।

उसके अलावा एक बड़े सड़क हादसे के बाद लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस , प्रशासन, इंश्योरेंस विभाग तथा अदालत भी अछूते नहीं रहते, जबकि सरकारी खजाने पर भी एक बड़े हादसे का असर पड़ता है। बावजूद इसके न तो वाहन म चालक सबक लेते हैं तथा न ही यातायात नियमों को लागू करवाने का दायित्व रखने वाले गंभीर हैं।

ऐसे वाहन चालकों की गलती के कारण होने वाले दर्दनाक हादसों में अकसर लोगों की जान चली जाती है या लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं, जिससे कई परिवार तो प्रभावित होते हैं, साथ हमारा सिस्टम भी बुरी तरह से प्रभावित होता। सड़कों पर वाहन चलाते वक्त होने वाले हादसों में गल्ती एक चालक की होती है जबकि खामियाजा अनेकों को भुगतना पड़ता है।

अकसर रांग साइड चलने वाले या रांग साइड मोड़ काटने वाले वाहन चालक ही हादसों का कारण बनते हैं। हाईवे पर चलने वाले लगभग हर वाहन की रफ्तार क्योंकि तेज होती है, ऐसे में संपर्क सड़क से रांग साइड होते हुए हाईवे पर चढ़ने वाले वाहन के कारण अगर कोई हादसा होता है तो या तो हादसे में किसी की मौत होती है अथवा गंभीर रूप से घायल होना निश्चित है।

शार्टकट के चक्कर में देते हैं हादसों को अंजाम अकसर देखा जाता है कि संपर्क सड़क से आने वाले वाहन को चालक जब किसी भी हाईवे पर चढ़ाता है, तो कट नजदीक न होने के कारण ज्यादातर वाहन चालक लंबा चक्कर लगाने से बचने के लिए शार्ट कट अपनाते हैं । रांग साइड चलते हुए खुद की जान को खतरे में डाल सामने से आने वालों के लिए भी चुनौती व मुसीबत बन जाते हैं। बाकायदा डायवर्शन बोर्ड लगाए हैं कुराली-रूपनगर-कीरतपुर साहिब-आनंदपुर साहिब हाईवे बीओटी योजना के अंतर्गत बीएससी सीएंडसी कंपनी द्वारा बनाया गया है, जबकि इसके रख-रखाव का दायित्व भी इसी कंपनी के पास है।

कंपनी द्वारा समय समय पर हाईवे की रिपेयर का काम किया जाता है, लेकिन राहत की बात यह कि कंपनी डायवर्शन देते वक्त निर्धारित मानकों पर पूरा अमल करती है। बाकायदा डायवर्शन के बोर्ड लगाए जाते हैं, एक एंबुलेंस खड़ी रखी जाती है ,जबकि वाहन चालकों को सुरक्षित निकालने के लिए दो कर्मचारी हाथों में लाल झंडी लेकर तैनात रहते हैं। कंपनी तो नियमों का पालन करती है, लेकिन यहां भी हाईवे के आसपास रहने वाले तथा दोपहिया या थ्री व्हीलरों पर सफर करने वाले रांग साइड वाहन दौड़ाते देखे जा सकते हैं और हादसों को न्योता देते हैं। हाईवे पर वहीं है कोई रेस्ट एरिया कुराली-रूपनगर--नंगल हाईवे पर 24 घंटे हजारों की संख्या में वाहन इधर से उधर जाते आते हैं ,लेकिन इस पूरे 80 किलोमीटर हाईवे पर एक रेस्ट एरिया नहीं है।

हालांकि इसकी शायद इस हाईवे पर जरूरत भी नहीं समझी जा सकती , क्योंकि हाईवे पर दोनों साइड जगह जगह ढाबे बने हुए वाहन चालकों के लिए आराम करने की व्यवस्था भी उपलब्ध रहती है। साइन बोर्ड का भी है अभाव रूपनगर- कीरतपुर साहिब-आनंदपुर साहिब व -नंगल हाईवे पर अनेकों कट एसे हैं , जहां से विभिन्न शहरों के लिए सड़कें निकलती या जुड़ती हैं। नियमानुसार ऐसी जगह वाहन चालकों की सुविधा के लिए साइन बोर्ड होना जरूरी है, जो सड़के बनाते वक्त लगाए भी गए थे, लेकिन कुछ सानम बोर्ड चोरी हो गए तो कुछ हादसे की भेंट चढ़ गए ।इसके बाद दोबारा साइन बार्ड लगाना किसी ने जरूरी नहीं समझा।

विशेष रूप से रूपनगर का सबसे व्यस्त रहने वाला मुख्य बाईपास जहां साइन बोर्ड उपलब्ध नहीं करवाया गया, जबकि इसी प्रकार बूंगा साहिब वाले मुख्य कट पर भी साइन बोर्ड नहीं लगाया गया, जिसके चलते वाहन चालकों को परेशानी तो होती है तथा कई बार वाहन आगे या पीछे करते हादसा भी हो जाता है।

Edited By: MOHAMMAD AQIB KHAN

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