संवाद सहयोगी, रूपनगर : रूपनगर के अंतर्गत पड़ते सर्व धर्म सत्कार तीर्थ धमाना में श्री कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर पिछले तीन दिनों से जारी सत्संग समागम आज संपन्न हो गया जबकि आज राशि भगवान श्री कृष्ण जी के बाल रूप को झूला-झुलाने का कार्यक्रम शेष रह गया है जिसके लिए बाद दोपहर से अनुष्ठान शुरू किए गए हैं। इस विशाल आयोजन में विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में बाबा प्यारा ¨सह जी की संगत पहुंची।

इस मौके पर सत्संग के दौरान संगतों का मार्ग दर्शन करते बाबा प्यारा ¨सह ने कहा कि 84 लाख योनी के बाद मनुष्य का शरीर प्राप्त होता है इसलिए इस शरीर के माध्यम से पुण्य कर्म कमाने चाहिए ताकि बार बार जन्म लेने से मुक्ति मिल सके तथा मोक्ष की प्राप्ति संभव हो सके। बाबा जी ने कहा कि मोक्ष का सबसे सरल मार्ग माता-पिता व गुरू का सम्मान तथा गऊ-गरीब की सेवा है। बाबा जी ने कहा कि शास्त्रों में इस बात का प्रमाण है कि बेजुबान की हाय व दुआ सीधे प्रभु के दरबार तक दस्तक देती है तथा उसका असर भी होता है। उन्होंने कहा कि गाय तथा गरीब भी बेजुबान की श्रेणी में आते हैं इसलिए इन्हें सताना या दुखी करना पापों के बोझ को बढ़ाने के बराबर है जबकि इनकी सेवा करना मोक्ष की प्राप्ति का साधन है। उन्होंने कहा कि प्रभु का सिमरन विचारों को शुद्ध बनाता है तथा सेवा मोक्ष के रास्ते को सरल बनाती है।

बाबा प्यारा ¨सह जी ने कहा कि जीवन में जब सुख मिलता है कोई भी परम पिता परमात्मा का शुक्राना नहीं करता लेकिन अगर कभी थोड़ा सा दुख मिले तो हर कोई परमात्मा को याद करने लगता है। उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि परमात्मा कभी किसी को सुख या दुख नहीं देते बल्कि हम जो कर्म करते हैं उसी के हिसाब से फल देने का काम करते हैं। बाबा जी ने कहा कि उनके द्वारा संगत व समाज के लिए जो कुछ भी किया जा रहा है वो सब परमात्मा के आदेश पर हो रहा है तथा स्पष्ट किया कि वो किसी को अपने पास से कुछ नहीं देते बल्कि जिसके लिए जो कुछ परमात्मा ने देने का हुक्म लगाया है उसी को पूरा कर रहे हैं। बाबा जी ने कहा कि पुरूषार्थ, सेवा व दान से जो आत्मिक शांति मिलती है उसे शब्दों में नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने भी गऊ, गरीब व जरूरतमंद की सेवा सहायता का संदेश दिया है।

इससे पहले संगतों ने बाबा प्यारा ¨सह जी के द्वारा बनवाए गए श्री दुर्गा मंदिर सहित श्री वरूण देव मंदिर, श्री शनिदेव मंदिर, श्री सूर्यदेव मंदिर, श्री विष्णु मंदिर, बाबा मस्त जी मंदिर, श्री शेषनाग मंदिर, भगत कबीर मंदिर में जहां श्रद्धा भाव से माथा टेका वहीं हर किसी ने इतिहासगढ़ साहिब जाकर गत 16 वर्षों से जल रही अखंड जोत के दर्शन करते हुए खुद को निहाल भी किया। इसके अलावा संगतों ने बाबा प्यारा ¨सह की प्रेरणा से धमाना के जंगलों में जाकर जंगली जीवों को जहां चारा डाला वहीं पक्षियों को विशेष रूप से तैयार करवाया गया अनाज भी डाला जबकि जंगलों में बाबा जी द्वारा पशु पक्षियों के लिए विशेष रूप से बनवाए गए तालाबों में पानी भी भरवाया गया। इस मौके बाबा जी के सेवादारों के द्वारा बाबा जी द्वारा रचित भजनों का गायन करते हुए संगतों को निहाल किया गया। इसके अलावा तीन दिन विशाल लंगर अलग से चलते रहे।

Posted By: Jagran