जागरण संवाददाता, रूपनगर

आइआइटी रूपनगर के सिविल इंजीनिय¨रग के सहायक प्रोफेसर ने देश के दो अन्य इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों के साथ भूकंप से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए अहम किताब लिखी है। इस किताब में भूकंप तरंगीय क्षेत्रों में खतरों की पहचान करना, मूल्यांकन करना तथा इनके प्रभावों को कम करना शामिल है। ये किताब लिखने में आइआइटी रूपनगर के सिविल इंजीनय¨रग के सहायक प्रोफेसर डॉ.नवीन जेमस, इंडियन इंस्टीच्यूट आफ साइंस बंगलुरू के सिविल इंजीनिय¨रग विभाग के प्रोफेसर डॉ.टीजी सीताराम तथा अमृता विश्वा विद्यापीठम कोयंबटूर तामिलनाडू के सिविल इंजीनिय¨रग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ.श्रीवलसा कलाथयर ने अहम भूमिका अदा की। इस किताब में बेहतर तरीके से संबंधित स्थान के भूकंप आने पर हिलने से उस स्थान का भूविज्ञान तथा भूगर्भिक मिट्टी के स्तर के तकनीकी गुणों तथा विशेषज्ञों के प्रभाव को बताया गया है। भूकंप के झटकों के बाद संबंधित स्थानों पर नुकसान तथा प्रभाव की समीक्षा भी की गई है। इस किताब में विभिन्न स्तर के माइक्रो, मैसो तथा मैक्रो लेवल के क्षेत्रों के लिए भूकंप तरंगीय संभावित जोनों का क्षेत्रीय करण लागू करने के लिए साइट के विवरण तथा साइट प्रभाव अनुमानों के विभिन्न स्तर की संभावनाओं के बारे में विस्तृत तथा व्यापाक समीक्षा पेश की गई है। इसके अलावा ये किताब साइट विशेषता तथा साइट प्रभाव अनुमान के लिए जरूरी मापदंडों की भी सिफारिश करती है जोकि माइक्रो, मैसो तथा मैक्रो स्तर के भूमि संख्या के लिए अपनाए जाने हैं। किताब के रूप में माइक्रो, मैसो तथा मैक्रो स्तर के भूकंप तरंगीय क्षेत्रीयकरण का केस अध्ययन पेश किया गया है। माइक्रो स्तर क्षेत्रीयकरण परमाणु ऊर्जा प्लांट के लिए पूरा किया गया था। मैक्रो स्तर क्षेत्रीयकरण को कर्नाटक राज्य के लिए किया गया था। प्राकृतिक आपदाओं से जोखिम का मूल्यांकन जरूरी डॉ.नवीन जेमस ने कहा कि शहरों की तरफ लोगों का बढ़ रहे रुझान के कारण शहरों का शहरीकरण बढ़ रहा है तथा और फैल रहा है। इसलिए भूकंप तथा अन्य प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं के कारण जोखिम का मूल्यांकन करना जरूरी है। ताकि मानवीय जीवन के जानी नुकसान होने तथा बुनियादी ढांचे के नुकसान को कम किया जा सके। भूंकप तरंगीय क्षेत्रीकरण भूकंप के विनाशकारी प्रभाव में कमी लाने के लिए पहला कमद है। नए ढांचे, इमारतों को डिजाइन करने या मौजूदा साइट पर भूकंप के क्षेत्र के लेवल को समझने के लि भूकंप तरंगीय क्षेत्रीयकरण भूकंप की साइट पर भूकंप के खतरे के स्तर को समझने के लिए भूकंप तरंगीय माइक्रो क्षेत्रीयकरण मै¨पग का इस्तेमाल कर सकते हैं। इंजीनियरों के अभ्यास करने के लिए तथा नीति बनाने वालों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि ये पुस्तक रोडमैप के रूप में सहयोगी साबित होगी।

Posted By: Jagran