संवाद सहयोगी, रूपनगर : बहरामपुर जमींदारा के टोल प्लाजा के समीप होमगार्ड रिटायर्ड वेलफेयर एसोसिएशन के नेतृत्व में सात अगस्त से मरनव्रत पर बैठे जगतार सिंह की हालत बिगड़ने लगी है। 20वें उसका वजन आठ किलो कम हो गया है। अभी तक किसी भी उच्च अधिकारी धरने पर बैठे जवानों की सुध नहीं ली है। इसके चलते कर्मचारियों में रोष है। हालांकि 18 अगस्त को जिला प्रशासन ने पुलिस की सहायता से भूख हड़ताल पर बैठे जगतार ¨सह को जबरदस्ती उठाते हुए सिविल अस्पताल में दाखिल करवा दिया था, लेकिन अगले दिन अस्पताल से छुट्टी मिलते ही जगतार ¨सह दोबारा भूख हड़ताल पर बैठ गए। जगतार ¨सह को भूख हड़ताल पर बैठे 20 दिन हो गए हैं।

10 जुलाई से कर्मचारी अनिश्चितकालीन धरने पर

रिटायर्ड होमगार्ड जवानों व कार्यरत जवानों की मांगों को लेकर 10 जुलाई से कर्मचारी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। कुछ कर्मचारी 18 जुलाई से क्रमिक भूख हड़ताल पर हैं। ये अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जाती उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

कर्मचारियों ने की जमकर नारेबाजी

सुबह होमगार्ड के जवानों ने अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की जबकि एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि जिला प्रशासन चाहे कितना भी धक्का क्यों न कर ले उनका धरना तथा जगतार ¨सह का मरनव्रत लगातार जारी रहेगा। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना तो आने वाले दिनों में मरनव्रत पर बैठने वालों की संख्या को बढ़ाया भी जा सकता है जिसके परिणामों के लिए जिला प्रशासन व सरकार जिम्मेवार होगी। एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष गुरदीप ¨सह ने कहा कि एसोसिएशन की तरफ से लगाया गया मोर्चा अब मांगें मंजूर होने के बाद ही हटाया जाएगा जबकि मरनव्रत पर बैठे जगतार ¨सह ने कहा कि पुलिस प्रशासन चाहे कितना भी धक्का कर ले उनका मरनव्रत जारी रहेगा लेकिन साथ यह भी चेताया कि अगर इस दौरान कोई अनहोनी हुई तो उसकी पूरी जिम्मेवारी होमगार्ड के उच्च अधिकारियों व सरकार की होगी। इस मौके प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मिट्ठू ¨सह मानसा सहित महासचिव अमरजीत ¨सह ब¨ठडा, अवतार ¨सह, प्रेस सचिव चरणजीत ¨सह, मदन गोपाल, अमर ¨सह, रणवीर ¨सह, जिलाध्यक्ष जगतार ¨सह, टेक्नीकल मकेनिकल यूनियन के अध्यक्ष जसवंत ¨सह, निर्मल ¨सह, जीवन ¨सह मानसा, केवल ¨सह बरनाला, सीता राम हिमाचल, गुरप्रीत ¨सह फाजिल्का, गुरजंट ¨सह फरीदकोट, अजीत ¨सह अमृतसर, तरसेम लाल नवांशहर, राम दयौल रोपड़ तथा धर्मपाल आदि विशेष रूप से हाजिर थे।

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