नंबर गेम:::

350 युवाओं को कुवैत में रोजगार का भरोसा देकर भेजा था

285 युवाओं को लौटना पड़ा था वापस

80 हजार से सवा लाख रुपये तक एजेंटों को देकर गए थे कुवैत

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अरूण कुमार पुरी, रूपनगर

विदेशों में रोजगार का लालच देकर पंजाब के युवाओं को विदेश भेजने वाले तथाकथित ट्रेवल एजेंट भोलेभाले युवाओं के साथ साथ सरकार को भी हर साल करोड़ों रूपये का चूना लगा रहे हैं जबकि इस गोरखधंधे पर नकेल कसने के नाम पर केवल ब्यान ही आते हैं लेकिन कभी किसी ट्रेवल एजेंट पर शिकंजा कसे जाने का मामला आज तक सामने नहीं आया है। आज पंजाब के अंदर ट्रेवल एजेंट व शिक्षा के नाम पर विदेश भेजने वाला व्यवसाय बड़े उद्योग का रूप ले चुका है जिसके साथ 50 हजार से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। ट्रेवल एजेंट व शिक्षा के नाम पर विदेश भेजने वालों की संख्या भी हजारों में है।

350 युवाओं को गत समय कुवैत में रोजगार का भरोसा देते हुए जिले के कथित एजेंटों के द्वारा भेजा गया था जिनमें से 285 युवाओं को वापस लौटना पड़ा है जिन्होंने अब जिला प्रशासन व जिला पुलिस से तथाकथित ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। इन युवाओं की अगर मानें तो ये 80 हजार से सवा लाख रुपये तक एजेंटों की झोली में डाल कुवैत गए थे और अब खाली हाथ लौट भी आए हैं। इस गोरखधंधे में बहुत सी हैं खामियां

ट्रेवल एजेंट के व्यवसाय में लाइसेंस फीस से ही खामियां शुरू हो जाती हैं जिसका पूरा लाभ एजेंट उठाते हैं जिसमें नेताओं के साथ-साथ मजबूरीवश ही सही पुलिस प्रशासन को भी सहयोग देना पड़ता है। लाइसेंस फीस की ही बात करें तो अगर ट्रैवल एजेंट पंजाब सरकार से लाइसेंस लेता है तो उसे मात्र 25 हजार रुपये फीस भरनी पड़ती है जबकि केंद्र सरकार की मान्यता लेने के लिए लाइसेंस फीस 50 लाख रुपये भरनी होती है। हैरानी इस बात की है कि आज तक 50 लाख फीस भरने वाले किसी भी एजेंट द्वारा की गई धोखाधड़ी का मामला सामने नहीं आया है जबकि पंजाब सरकार को 25 हजार रूपया फीस भरने वाले एजेंटों द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी के मामले हर दिन सामने आते रहते हैं। यहां यह लिखना भी जरूरी है कि केंद्र से लाइसेंस हासिल करने वाले एजेंट विदेश भेजने के नाम पर जो पैसा उम्मीदवार से वसूल करते हैं उसका जहां रिकार्ड रखते हैं हैं उन्हें रकम पर 18 फीसदी जीएसटी भी देना होता है लेकिन राज्य सरकार से लाइसेंस लेने वाले किस उम्मीदवार से कितना पैसा लेते हैं उसका कोई हिसाब नहीं जबकि जीएसटी देना तो दूर ज्यादातर के पास तो जीएसटी नंबर तक नहीं है। रूपनगर में केंद्र से मान्यता एवं लाइसेंस प्राप्त एजेंट तीन

अकेले रूपनगर जिले की अगर बात करें तो इस जिले अंदर केंद्र से मान्यता एवं लाइसेंस प्राप्त एजेंटों की संख्या मात्र तीन है जबकि राज्य सरकार से लाइसेंस प्राप्त एजेंटों की संख्या 100 से अधिक है तथा कुछ ऐसे भी हैं जिनका कहीं कोई रिकार्ड ही नहीं है। इसी प्रकार आईलेट्स एवं शिक्षा के नाम पर विदेश भेजने वालों को भी जीएसटी नंबर लेना व 18 फीसदी जीएसटी देना जरूरी होता है लेकिन यहां बिना जीएसटी नंबर लिए ही काम चलाया जा रहा है। कुवैत से लौटे युवकों को इंसाफ का मिला भरोसा

अब अगर कुवैत से बैरंग लौटे 285 युवाओं की अगर बात करें तो इनमें से रूपनगर के गांव भनुपली वासी अमरीक ¨सह सहित गांव लंग मजारी के हरदीप ¨सह व कुलजीत ¨सह, गुरदासपुर के हर¨जदर ¨सह व गुरनाम ¨सह, लमलेहड़ी के पर¨मदर ¨सह, मजारी के सोनू ¨सह, लोदीपुर के करनैल ¨सह व जगजीत ¨सह आदि ने बताया कि उनके साथ जिले के जिस एजेंट ने धोखा किया है उसकी शिकायत उन्होंने डीसी सुमीत जारंगल तथा जिला पुलिस प्रमुख स्वप्न शर्मा से की है।

कोट्स

जिले के अंदर अवैध ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सिविल व पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम बनाई जा रही है जो बाकायदा सारे मामले की जांच करेगी तथा यह जांच भी की जाएगी कि अब तक ऐसे एजेंट काम कैसे करते रहे हैं। जिला पुलिस प्रमुख स्वप्न शर्मा ने तो तुरंत एक्शन लेते हुए एसपी अज¨वदर ¨सह को सारे मामले की जांच करने का दायित्व भी सौंप दिया है जबकि एसपी अज¨वदर ¨सह का कहना है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द जांच पूरी कर उच्च अधिकारियों को अगली कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी।

सुमित जारंगल, डीसी,रूपनगर

Posted By: Jagran