जागरण संवाददाता, रूपनगर

जिला रूपनगर में लावारिस पशुओं की संभाल के लिए कोई उचित प्रबंध नहीं हैं। इन लावारिस पशुओं की मार राहगीर झेल रहे हैं। न तो लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए कोई बंदोबस्त है न ही ऐसे लोगों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई की व्यवस्था जो अपने पशुओं को सड़कों पर मरने के लिए छोड़ रहे हैं। लोग दुधारू पशुओं को चरने के लिए दिन में खुला छोड़ देते हैं और यही पशु हादसे का कारण बन रहे हैं। जिले में साल 2018 जनवरी से लेकर अब तक आठ लोग अपनी जिदगी से हाथ धो बैठे हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पशुओं को लावारिस छोड़ने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया है। साथ ही लोगों को ये सुविधा भी दी है कि एक बेकार हो चुके (दूध न देने वाले) पशु को गोशाला में प्रति दिन 30 रुपये चारे के लिए दिए जाएं।जिले में सुखेमाजरा में सरकारी गोशाला है। उसके अलावा नौ गोशालाएं जिले के तकरीबन बड़े शहर व कस्बे में है। इसके बावजूद लावारिस पशुओं की तादात बढ़ती जा रही है। दूसरा अपनी देसी नसलों को छोड़ किसान ज्यादा दूध देने वाली एचएफ व जर्सी गायों को पालने में ज्यादा तवज्जो देते हैं। लेकिन ये गाय देसी गायों के दूध के मुकाबले कम गुणवत्ता वाला दूध देती हैं। ज्यादा दूध के चक्कर में इनकी तादात लगातार बढ़ रही है, जो चिता का विषय है। जिले में एक सरकारी सर्वे के मुताबिक 2300 से 2400 लावारिस पशु हैं। इनमें दिन रात इजाफा हो रहा है। तीन माह से घर पर बैठा हूं: बहादुर सिह लावारिस पशुओं की वजह से होने वाले हादसे में घायल बहादुर सिंह ने बताया कि हादसे में उसकी टांग टूट गई। वो एक करीब एक माह के लिए घर से बैठा है। अगर लावारिस पशु न हो तो लोगों का सड़कों पर आना जाना सुरक्षित हो जाएगा। रात के अंधेरे में तो लावारिस पशु बहुत खतरनाक हो जाते हैं। आए दिन कोई न कोई हादसा पशुओं की वजह से होता है। कोई इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। पंजाब सरकार को ऐसे कानून बनाने चाहिए, जिससे पशु सड़कों पर लावारिस न घूमे और शहर के लोग खासकर युवा हादसों का शिकार होने से बचे रहें। घायलावस्था में तंदुरुस्त होने की आशा में पड़े रहना बहुत मुश्किल है।

कार्रवाई करना जरूरी लावारिस पशु गंभीर समस्या बन चुके हैं। लावारिस पशुओं को लेकर उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, जो अपने निजी फायदे के लिए पशुओं को दिन में चरने के लिए छोड़ते हैं और फिर सायं उन्हें दूध लेने के लिए बांध लेते हैं।

राजेश कुमार, मेंबर जिला शिकायत निवारण कमेटी कानूनन जुर्म करार दिया जाए गायों का लावारिस घूमना हम सबके गैर जिम्मेदारना रवैये का असर है। न तो सख्त कानून है न ही गायों की रजिस्ट्रेशन है। गाय को धार्मिक ग्रंथों में मां का दर्जा दिया गया है, लेकिन दूध देने से असमर्थ होने पर कभी मां को सड़क पर छोड़ना कानूनन जुर्म करार दिया जाना चाहिए और सख्त एक्शन होना चाहिए।

हरमिदरपाल वालिया, पार्षद रूपनगर।

जमीर क्यों जिदा नहीं रखते लोग

हमें अपने जमीर को जिदा रखना चाहिए। केवल फायदे के लिए पशु को पालना और फिर छोड़ देना ये मानव की प्रवृति नहीं रही। जिस पशु का दूध पी लिया उससे तो स्नेह हो जाता है। ऐसे में हम अपने थोड़े से फायदे के लिए क्यों उन्हें सड़कों पर मरने के लिए छोड़ देते हैं।

चरनजीत सिंह चन्नी, मेंबर जिला शिकायत निवारण कमेटी रूपनगर

गोशाला निभाए जिम्मेदारी: पोमी सोनी नगर कौंसिल अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाए। कौंसिल की जिम्मेदारी बनती है कि लावारिस पशुओं को पकड़कर गोशाला में छोड़ें। गोशाला को नियमित रूप से उसकी बनती ग्रांट भी दी जाए, ताकि वो लावारिस पशुओं की खुराक का इंतजाम कर सके।

पोमी सोनी, पार्षद रूपनगर यूपी सरकार की तरह मिले सहायता पालतु पशुओं की रजिस्ट्रेशन होनी चाहिए। जो भी किसान या डेयरी मालिक अपने दुधारू पशु को बेकार होने पर बाहर छोड़ता है, उसकी पकड़ करना जरूरी है। उसे जुर्माना हो और भविष्य में लोग इस तरह पशुओं को बेसहारा न छोड़ें। उत्तर प्रदेश सरकार की तरह पंजाब में भी बेकार हो चुके पशुओं के रखरखाव के लिए प्रतिदिन के हिसाब से राशि दी जानी चाहिए। तब जाकर गायों की बेकद्री बंद होगी। इंजी.भारत भूषण शर्मा, गोपाल गोशाला रूपनगर।

Posted By: Jagran

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