संवाद सहयोगी, रूपनगर: आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता एडवोकेट दिनेश चड्ढा ने सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के मुफ्त होने वाले अल्ट्रासाउंड सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गर्भवती महिलाओं के लिए जो अल्ट्रासाउंड सिस्टम अपनाया जाता है वो गरीब व मध्यम वर्ग पर भारी पड़ रहा है। जिले के सरकारी अस्पतालों में हर माह 500 से 1000 बच्चों का जन्म होता है, लेकिन सरकार तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं को बनती सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में रेडियोलाजिस्ट न होने के कारण सरकारी अस्पतालों में

अल्ट्रासाउंड मशीनें बंद पड़ी हैं, जिसके चलते जरूरत पड़ने पर सरकार के पैनलाइज किए प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटरों से गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए भेजा जाता है। यहां पर अल्ट्रासाउंड लोगों को अपने खर्चे पर ही करवाने पड़ते हैं। एडवोकेट चड्ढा ने बताया कि डायरेक्टर नेशनल हेल्थ मिशन द्वारा जिला स्वास्थ्य अफसरों को लिखित रूप से हिदायत की हुई है कि अगर किसी गर्भवती महिला को एक से ज्यादा अल्ट्रासाउंड करवाने की जरूरत महसूस होती है तो उस पर होने वाला खर्च जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम में से किया जाएगा, बावजूद इसके गरीब व मध्यम वर्ग की गर्भवती महिलाओं को लेवल दो व लेवल तीन तथा कलर अल्ट्रासाउंड के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि सारे सरकारी अस्पतालों में हर प्रकार का अल्ट्रासाउंड पूरी तरह से मुफ्त सुनिश्चित बनाया जाए।

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