जागरण संवाददाता, रूपनगर: हिमाचल के धर्मशाला में विधानसभा भवन के गेट पर खालिस्तान लिखे झंडे और दीवारों पर खालिस्तान लिखने के मामले के रूपनगर के मोरिडा से गिरफ्तार आरोपित और उसके रुड़की हीरां वाले साथी ने ही सचिवालय के बाहर बैसाखी वाले दिन खालिस्तान लिखा झंडा लगाया था। इस मामले में रूपनगर पुलिस एसजेएफ के नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू को नामजद करेगी और मामले की इंक्वायरी के लिए गिरफ्तार आरोपित हरबीर सिंह राजू को हिमाचल से प्रोडक्शन वारंट पर लाएगी। रूपनगर के एसएसपी डा.संदीप गर्ग ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि हिमाचल पुलिस मोरिडा के वार्ड नंबर एक निवासी हरबीर सिंह उर्फ राजू को गिरफ्तार करने में कामयाब रही है और दूसरा आरोपित गांव रुड़की हीरां का परमजीत सिंह उर्फ पम्मा अभी पुलिस गिरफ्त से बाहर है। पन्नू ने इंटरनेट मीडिया पर खालिस्तान झंडा लगाए जाने के मामले में जिम्मेदारी ली थी। हिमाचल पुलिस के पंजाब पुलिस से पहले मामले को ट्रेस करने में बाजी मारने की बात स्वीकार करते हुए एसएसपी ने कहा कि दोनों आरोपितों का रिकार्ड आपराधिक है। राजू पर कार झपटने समेत दो मामले दर्ज हैं, जबकि पम्मा पर कुल सात मामले दर्ज हैं। इनमें से छह चोरी और सेंधमारी के हैं। एसएसपी ने कहा कि दोनों आरोपितों ने हिमाचल में स्कूटी पर जाकर वारदात को अंजाम दिया। रात के समय झंडे और दीवार पर खालिस्तान लिखने के बाद वीडियो बनाकर आगे संबंधित संपर्क को भेजी और वहीं से आगे इंटरेनेट मीडिया पर फोटो वायरल हुईं। एसएसपी गर्ग ने कहा कि हरबीर सिंह राजू ने पुलिस की पूछताछ में माना कि सचिवालय के बाहर खालिस्तान लिखा झंडा राजू और पम्मा ने ही लगाए थे। राजू को हिमाचल से प्रोडक्शन वारंट पर लाया जाएगा और आगे की इंक्वायरी मुकम्मल की जाएगी। सीसीटीवी की पकड़ में आई स्कूटी, तभी आए काबू आरोपितों की स्कूटी धर्मशाला में घटना वाले दिन सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में आ गई। स्कूटी के नंबर से पहचान होने के बाद हिमाचल पुलिस के लिए आरोपितों को पकड़ना काफी आसान हो गया। ये स्कूटी हरबीर सिंह राजू ने किसी सुभाष नाम के व्यक्ति से सोलह हजार रुपये में गिरवी रखी थी। रूपनगर पुलिस ने बैसाखी वाले दिन 15 अप्रैल को अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मात्र 10 हजार के लिए किया काम पुलिस सूत्रों के मुताबिक दोनों आरोपितों ने मात्र दस हजार रुपये के लिए एक जगह खालिस्तान के बैनर लगाए। दोनों चोरी के बजाय इस तरह खालिस्तान लिखने के एवज में आसानी से पैसे कमाने की लालच में इस काम में जुटे। दस हजार रुपये में भी दोनों में आधे आधे मात्र पांच पांच हजार रुपये ही आए।

Edited By: Jagran