जागरण संवाददाता, रूपनगर

रोटी और कपड़े के बाद मनुष्य की सबसे अहम जरूरत मकान बनाना आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। जिले में क्रशर इंडस्ट्री को लगा ताला खुलने का नाम नहीं ले रहा। जिले में जो अवैध खनन हो भी रहा है उसका आम लोगों को कोई फायदा नहीं है। क्योंकि इसके दाम ही आसमान छू रहे हैं। खनन माफिया जरूर मालामाल हो रहा है। रात के अंधेरे में रेत से भरे ट्रक दनादन सड़कों से गुजर रहे हैं, लेकिन पिस आम आदमी रहा है। ये ही स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि खनन विभाग का क्या स्टेट्स है और कौन से अफसर इसमें तैनात किए गए हैं। बता दें कि बरसात के दौरान खनन करने पर पूर्ण रोक होती है। बरसात के सीजन में खनन नहीं किया जा सकता। जिले में इसके बावजूद कथित रूप से अवैध खनन हो रहा है। देर रात और सुबह के समय रेत ले जाया जा रहा है। खास बात ये है कि अब टिप्परों में कम और बंद बॉडी 12 और 18 टायरी ट्रकों में रेत ले जाया जा रहा है। अब पता नहीं कैसे पुलिस नाकों तथा स्पेशल नाकों से ये ट्रक गुजर रहे हैं। क्या इनके पास कोई स्पेशल मंजूरी है। जांच का विषय ये है कि बरसात में खनन की मंजूरी न होने के बावजूद रेत कहां से लाई जा रही है। जिन लोगों ने अपने मकान बनाना शुरू कर रखे हैं तथा जो लेबर कभी क्रशर इंडस्ट्री पर अपनी रोजी चला रही थी, वो और उनके परिवार मंदहाली से गुजर रहे हैं और दूसरे काम ढूंढ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जिले में 170 के आसपास क्रशर हैं लेकिन कोई भी क्रशर नहीं चल पा रहा। जिन क्रशरों पर कच्चा माल पड़ा भी है, वो भी बंद हैं। पंजाब सरकार द्वारा खनन पॉलिसी स्पष्ट न करने के कारण क्रशर इंडस्ट्री बर्बाद होने के कगार पर पहुंच चुकी है। क्रशरों पर लगी मशीनरी को जंग लगने लगा है। यही नहीं, रेत बजरी ढोने में लगे टिप्पर मालिक या तो अपने टिप्परों को बेच रहे हैं या कारोबार ही बदल रहे हैं तथा दूसरे जिलों में जाकर काम कर रहे हैं। 17 हजार का मिलता है ब्लैक में रेत का ट्रक रेत तो अफीम की तरह हो गया है। छिपछिपाकर कोई ट्राली या ट्रक रेत का मंगलवा ले तो वो खुद को खुशनसीब समझता है। रेत के दाम आसमान छू रहे हैं। जो रेत का ट्रक (800 फीट) कैप्टन सरकार के सत्ता में आने से पहले 10 हजार रुपए पहुंच मिलता था, वो अब बढ़कर 16 से 17 हजार रुपये के बीच मिल रहा है। इसी तरह रेत की ट्रॉली (120 फीट) 1800 से 2 हजार रुपए के बीच मिल जाती थी वो अब 3200 से 3500 रुपए के बीच मिल रही है। एक्शन अथॉरिटी कौन, पता नहीं खनन विभाग को इंडस्ट्री विभाग से अलग करने के बाद ये ही स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि जिले में अब खनन से संबंधित विभाग में एक्शन अथॉरिटी कौन होगा। दैनिक जागरण ने पहले इस संबंध में जीएम रहे ह¨रदरजीत ¨सह पन्नू से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि खनन विभाग अब इरीगेशन विभाग को दे दिया गया है। उनके पास तो दो अढ़ाई माह पहले से चार्ज नहीं है। इसके बाद जब इरीगेशन विभाग रूपनगर के इरीगेशन विभाग के एक्सईएन विजय गर्ग से संपर्क किया गया तो उनका कहना था कि इरीगेशन विभाग के पास खनन विभाग का चार्ज नहीं आया है। बल्कि इरीगेशन विभाग से कुछ स्टाफ लेकर अलग खनन विभाग बनाया गया है। इसका जिले में प्रमुख कौन है, उन्हें इसका पता नहीं है। हां, पहले चर्चा थी कि इरीगेशन विभाग का खनन विभाग को एक ¨वग बनाया जाएगा लेकिन बाद में खनन का नया विभाग बनाया गया है।

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