जागरण संवाददाता, रूपनगर

रूपनगर में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन आधा दर्जन से ज्यादा संगठनों के कर्मचारियों ने रूपनगर हेडव‌र्क्स मार्ग पर रोष मार्च निकालते हुए नए बस स्टैंड के समक्ष ट्रैफिक जाम लगाया। ट्रैफिक जाम के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। एक घंटे लगाए ट्रैफिक जाम के दौरान बस सवारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बटाला जाने वाली एक बस ट्रैफिक जाम के कारण एक घंटा रूपनगर में ही रुकी रही। उधर, बैंक खुले तो रहे लेकिन लोगों के नाममात्र काम ही बैंकों में हो पाए। 50 लाख रुपये का लेनदेन ठप रहा। रूपनगर रोडवेज डिपो को एक दिन में नौ लाख के रेवेन्यू का आसपास का घाटा पड़ा है। रूपनगर डिपो से 10 से 12 के बीच ही बसें रवाना हो पाई। रोडवेज के बेड़े में 111 बसें हैं। इनमें से अधिकतर पर पनबस स्टाफ और कांट्रेक्ट स्टाफ तैनात है। जोकि दो दिवसीय हड़ताल में बढ़चढ़कर भाग ले रहे हैं। पक्के कर्मचारियों की कमी के कारण रोडवेज की नाममात्र बसें ही चल पाई हैं। यही नहीं, डाकघर समेत एलआइसी और बीएसएनएल कर्मचारियों ने भी हड़ताल को समर्धन देते हुए प्रदर्शन किए। रूपनगर में सुबह कामरेड गुरदेव ¨सह बागी की अगुआई में कामरेड संगठनों के नुमाइंदे इकट्ठे होने शुरू हुए। उधर, आसरों इंडस्ट्रियल एरिया से सीटू के प्रांतीय सचिव कामरेड महा ¨सह रोड़ी की अगुवाई में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के नुमाइंदों ने रोष मार्च निकालते हुए रूपनगर के नए बस अड्डे पर पहुंचे। यहां सभी ट्रेड यूनियनों जिनमें आशा वर्कर फैसिलीटेटर यूनियन (सीटू) , आशा वर्कर मुलाजिम, भारत मिस्तरी निर्माण मजदूर यूनियन, आइईटी भद्दल कालेज इंप्लाइज यूनियन, स्वराज माजदा ड्राइवर वर्कर यूनियन, स्वराज माजदा वर्कर यूनियन, लाल झंडा ग्रामीण चौकीदार यूनियन, लाल झंडा इंडस्ट्री कर्मचारी यूनियन के नुमाइंदों ने शिरकत की। इस दौरान कामरेड महा ¨सह रोड़ी, कामरेड गुरदेव ¨सह बागी, पंजाब रोडवेज पनबस कांट्रेक्ट वर्कर के प्रधान कुल¨वदर ¨सह, चेयरमैन जस¨वदर ¨सह, महासचिव ज¨तदर ¨सह, गदीफ ¨सह, आंगनबाड़ी वर्कर यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गुरदीप कौर, हरी ¨सह, जरनैल ¨सह, मिड डे मील वर्कर यूनियन इंटक की प्रधान जस¨वदर कौर, सुखवीर ¨सह, गुरचरन ¨सह, जैमल ¨सह, अवतार ¨सह, आदि ने संबोधित किया। ये हैं मांगें केंद्र और पंजाब सरकार की मजदूर व मुलाजिम विरोधी नीतियों के खिलाफ ये दो दिवसीय हड़ताल की गई है। ट्रेड यूनियनें ठेकेदारी सिस्टम खत्म करने व बराबर काम का बराबर वेतन देने की मांग कर रही हैं। यूनियन का कहना है कि सुप्रीमकोर्ट ने 26 अक्टूबर 2016 को फैसला दिया था, जिसमें अनस्किलड मजदूर को कम से कम 600 रुपये दिहाड़ी, स्किल्ड वर्कर, आंगनबाड़ी वर्कर आशा वर्कर, मिड डे मील वर्कर और ग्रामीण चौकीदारों को कम से कम वेतन कानून के घेरे में लेने की हिदायत की गई है, को लागू करवाने के लिए ये हड़ताल की गई है।

Posted By: Jagran

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