जागरण संवाददाता, रूपनगर

जैसे ही पंचायती राज चुनाव का बिगुल बजा, वैसे ही चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों तथा उनके समर्थकों ने लालपरी की तस्करी तेज कर दी है। अभी उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र भरने से पहले लालपरी की खेप मंगवाने को तरजीह दे रहे हैं, क्योंकि पंजाब में चुनावों में लालपरी का असर हमेशा से सिर चढ़कर बोलता रहा है। रूपनगर पुलिस ने पिछले एक हफ्ते में लगातार दूसरी अवैध शराब की खेप पकड़ी है। पहले ¨सघ भगवंतपुर पुलिस ने पिछले शुक्रवार को 115 पेटी शराब पकड़ी थी और अब उसके चार दिन बाद थाना सदर पुलिस ने 260 पेटी अंग्रेजी शराब पकड़ी है। शराब जिस गाड़ी में लदी थी, उसके चालक के खिलाफ फिलहाल केस दर्ज किया गया है।

चालक न बिल पेश कर पाया न परमिट, गिरफ्तार

थाना सदर रूपनगर में प्रेस कांफ्रेंस करके डीएसपी (आर) गुर¨वदर ¨सह ने बताया कि चंडीगढ़ में बिक्री योग्य शराब की 260 पेटियां बरामद की गई हैं। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि भरपूर चंद पुत्र लख¨वदर ¨सह वासी सिहाला थाना समराला जिला लुधियाना म¨हदरा बुलैरो गाड़ी (पीबी10-बीएक्स3633) में नाजायज शराब लोड करके चंडीगढ़ से शहर की तरफ आ रहा है। जिसके बाद थाना सदर पुलिस स्टेशन के एसएचओ इंसपेक्टर राजपाल ¨सह ने पुलिस पार्टी समेत नेशनल हाइवे स्थित गांव भ्यौरा बस अड्डा के निकट नाकाबंदी की। नाकाबंदी के कुछ मिनटों बाद ही म¨हदरा बोलेरो गाड़ी आ गई और पुलिस ने उसे चे¨कग के लिए रोक लिया। गाड़ी में 260 पेटी शराब बरामद की गई।गाड़ी चालक भरपूर चंद को बरामद शराब संबंधी बिल मांगा तो वो शराब का बिल पेश नहीं कर पाया और न ही कोई लाइसेंस परमिट पेश कर पाया। वहीं

रूपनगर के एसएसपी स्वपन शर्मा ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि चुनावों में शराब का दुरुपयोग न हो इसके लिए पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। पुलिस गुप्त सूचना के आधार पर तुरंत एक्शन ले रही है।

तस्करी का ये है तरीका शराब के तस्कर इतनी होशियारी से तस्करी करते हैं कि गाड़ी पकड़े जाने पर भी आगे तस्करी की पहली कड़ी पुलिस के हाथ न आए इसलिए साजिश के तहत काम करते हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जहां भी शराब की फैक्ट्रियां हैं, वहां से एक गाड़ी शराब लोड करके बाहर लाती है तथा किसी सुनसान जगह पर दूसरी गाड़ी जिसने आगे खेप मंजिल तक पहुंचानी होती है, में पेटियां लोड कर दी जाती हैं। इस दौरान न तो मंजिल तक शराब ले जाने वाले चालक को पता चलता है कि शराब की खेप कौन दे रहा है और किस फैक्टरी से आई है। दूसरा चालक को सामान्य किराये से तीन चार गुणा ज्यादा पैसे दे दिए जाते हैं ताकि वो ज्यादा सवाल जवाब न करे। शराब कौन कहां से लाया और किसने उसे खेप दी, किसी को पता नहीं चलता। इसमें एक पेंच ये है कि जो गाड़ी फैक्टरी से शराब लेकर निकलती है उसका नंबर अकसर जाली ही लगा दिया जाता है, ताकि पहचान छिपाई जा सके।

Posted By: Jagran