संवाद सूत्र, मोरिडा : कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए पंजाब सरकार की तरफ से लगाए क‌र्फ्यू का ज्यादातर प्रभाव मेहनत मजदूरी करके अपने परिवारों का पालन करने वाले मजदूरों पर पड़ रहा है। चाहे सरकार की तरफ से गरीब परिवारों के लिए खाने पीने और रहने का प्रबंध किया गया है। लेकिन यह सुविधाएं उनको न मिलने के कारण अब वह परिवारों समेत अपने पैतृक घरों को जाने के लिए मजबूर हो गए हैं।

इसकी मिसाल लुधियाना-मोरिडा मार्ग पर पड़ते गांव संगतपुरा में बस स्टैंड में रुके चार मजदूर परिवारों के करीब 16 पारिवारिक सदस्यों से मिलती है। उनका कहना है कि उनके पास खाने पीने के लिए राशन नहीं है इस कारण उन्होंने ग्राम पंचायत की तरफ से दिया गए आज्ञा पत्र को साथ लेकर घर जाने का मन बनाया है। जबकि उनको रास्ते में जगह जगह परेशान किया जा रहा है लेकिन वह रुकने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं। रघुबीर हरवाल, पशपिदर, मक्खन और कमलेश ने बताया कि वह मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं और पिछले लंबे समय से गांव डुमेली जिला कपूरथला में रहकर मजदूरी करके अपने बच्चों का पालन पोषण करते आ रहे हैं। क‌र्फ्यू के कारण उनका काम बिल्कुल बंद हो गया है जिस कारण अब उनके पास कोई पैसा नहीं है और न ही खाने पीने के लिए राशन है। इस लिए वह अपने परिवारों समेत रिक्शा रेहड़ी और मोटरसाइकिलों के माध्यम से मध्य प्रदेश जाने के लिए मजबूर हैं। जबरदस्ती नहीं कर सकते : बीडीपीओ

एसडीएम मोरिडा हरबंस सिंह ने कहा कि इस संबंधी बीडीपीओ हरकीरत सिंह धालीवाल को जानकारी दी गई है। बीडीपीओ हरकीरत सिंह ने कहा कि मजदूरों को घर जाने के लिए दिया गए आज्ञा पत्र के बारे में कोई जानकारी नहीं है जबकि प्रशासन किसी के साथ भी जबरदस्ती नहीं कर सकता। यदि यह मजदूर रुकने के लिए तैयार हैं तो उनके खाने पीने और रहने का प्रबंध किया जाएगा।

Posted By: Jagran

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