कौन हैं पटियाला के दिनेश कुमार? उपकरण नहीं मिले तो कंप्यूटर पर बना दी पूरी फिजिक्स लैब, मिला राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार
पटियाला के सरकारी विक्टोरिया गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल के फिजिक्स लेक्चरर डॉ. दिनेश कुमार ने उपकरणों की कमी दूर करने ...और पढ़ें

राष्ट्रपति से पुरस्कार लेते डॉ. दिनेश कुमार। फोटो जागरण
HighLights
उपकरणों की कमी दूर करने को बनाई जीरो-कॉस्ट वर्चुअल लैब।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया।
कंप्यूटर प्रोग्रामिंग से छात्रों के लिए प्रैक्टिकल लर्निंग को सुलभ बनाया।
गौरव सूद, पटियाला। प्रयोगशाला में उपकरण कम हों, कुछ खराब पड़े हों और विद्यार्थियों की प्रैक्टिकल पढ़ाई प्रभावित हो रही हो तो आमतौर पर समाधान नए उपकरण खरीदने में तलाशा जाता है। पटियाला के सरकारी विक्टोरिया गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल के फिजिक्स लेक्चरर डॉ. दिनेश कुमार ने इसका बिल्कुल अलग रास्ता चुना।
उन्होंने कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के जरिये बिना किसी फंड के जीरो-कास्ट वर्चुअल फिजिक्स लैब तैयार कर दी। इसी नवाचार और शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और गत दिनों शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया।
डॉ. दिनेश कुमार का कहना है कि उपकरणों की कमी विद्यार्थियों की प्रैक्टिकल लर्निंग में बाधा नहीं बननी चाहिए। इसलिए प्रोग्रामिंग के जरिये ऐसी लैब तैयार की, जिसमें बच्चे खुद प्रयोग कर सकें।
स्कूल को किसी अतिरिक्त बजट की जरूरत नहीं पड़ी
डॉ. दिनेश ने वर्ष 2021-22 में तैयार की गई वर्चुअल लैब को इस तरह विकसित किया कि विद्यार्थी केवल प्रयोग का वीडियो देखने के बजाय उसे खुद कर सकें। कंप्यूटर स्क्रीन पर वर्चुअल उपकरणों का इस्तेमाल कर प्रयोग की पूरी प्रक्रिया समझी जा सकती है।
विद्यार्थी उपकरणों की कार्यप्रणाली, रीडिंग लेना, जीरो एरर निकालना और प्रयोग के विभिन्न चरणों को सीखते हैं। इससे उन विद्यार्थियों को भी प्रैक्टिकल सीखने का अवसर मिलता है, जिन्हें वास्तविक प्रयोगशाला में उपकरणों की कमी या खराब होने के कारण पर्याप्त अभ्यास नहीं मिल पाता। खास बात यह है कि इसके लिए स्कूल को किसी अतिरिक्त बजट की जरूरत नहीं पड़ी।

डॉ. दिनेश कुमार की शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने इस नवाचार को संभव बनाया। उन्होंने पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से फिजिक्स में एमएससी और पीएचडी के साथ कंप्यूटर साइंस में एमएससी और एमफिल किया है। करीब 25 वर्ष से अध्यापन से जुड़े डा. कुमार वर्ष 2016 से सरकारी विक्टोरिया गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में सेवाएं दे रहे हैं।
40 शोधपत्र विभिन्य पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके
वर्चुअल लैब के साथ उन्होंने 100 से अधिक जीरो-कास्ट टीचिंग एड भी तैयार किए हैं। इनसे कोणीय संवेग, इंटरफेरेंस, डिफ्रैक्शन जैसी कठिन अवधारणाओं को रोजमर्रा के उदाहरणों और गतिविधियों के माध्यम से सरल बनाया जाता है। उनके 40 शोधपत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यूड पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
परिणाम में दिखा नवाचार का फायदा
नवाचार का फायदा विद्यार्थियों के परिणामों में भी दिखाई दिया। डा. दिनेश कुमार के कई विद्यार्थियों ने फिजिक्स में मेरिट हासिल की है। उनके 60 से अधिक पूर्व विद्यार्थी मेडिकल, इंजीनियरिंग, फार्मेसी और फिजियोथेरेपी जैसे क्षेत्रों में प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला ले चुके हैं। कई डाक्टर और इंजीनियर बन चुके हैं।
निशुल्क कोचिंग भी दे रहे डॉ. दिनेश
वर्तमान में डा. कुमार 11वीं और 12वीं के करीब 80 विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं। नियमित कक्षाओं के अलावा वह निश्शुल्क कोचिंग और रेमेडियल कक्षाएं भी लगाते हैं। विज्ञान संगोष्ठियों, क्विज और ओलंपियाड में भी उनके विद्यार्थी पंजाब का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वे 2020 में पंजाब स्टेट टीचर अवार्ड से भी सम्मानित हो चुके हैं।
पुरस्कार से बढ़ी जिम्मेदारी
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए पंजाब से 134 शिक्षकों ने आवेदन किया था। बहुस्तरीय चयन के बाद छह शिक्षक राज्य स्तर तक पहुंचे और राष्ट्रीय ज्यूरी ने डा. दिनेश कुमार का चयन किया। पुरस्कार मिलने के बाद डा. दिनेश ने कहा कि उनके लिए जिम्मेदारी अब बढ़ गई है।
उनका लक्ष्य अपने नवाचार को अधिक से अधिक स्कूलों तक पहुंचाना है। एससीईआरटी के स्टेट रिसोर्स पर्सन के रूप में वह विभिन्न संस्थानों में वर्चुअल लैब का प्रदर्शन भी कर चुके हैं।
स्कूल की फिजिक्स लैब में हर समय सभी उपकरण उपलब्ध नहीं होते थे। कई बार कुछ उपकरण खराब भी रहते थे, इसलिए हर प्रयोग को बार-बार करना संभव नहीं हो पाता था। वर्चुअल लैब ने यह परेशानी काफी हद तक दूर कर दी। हम कंप्यूटर पर एक ही प्रयोग कई बार कर सकते हैं और परीक्षा से पहले सभी प्रयोगों की दोबारा प्रैक्टिस भी हो जाती है।
- परनीत, छात्रा
फिजिक्स में जीरो एरर जैसी छोटी-छोटी बातें बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। पहले मुझे इसका महत्व केवल किताब में पढ़कर ही पता था, लेकिन वर्चुअल लैब में जब खुद उपकरणों के साथ प्रयोग किया तो समझ आया कि रीडिंग में होने वाली मामूली सी गलती भी अंतिम परिणाम को प्रभावित कर सकती है। यहां प्रयोग करते हुए मुझे उपकरणों की कार्यप्रणाली और रीडिंग लेने का सही तरीका समझने का मौका मिला।
- प्रांजल सिंगला, छात्रा
