जेएनएन, पटियाला। पराली न जलाने और पटाखे कम फोड़ने को लेकर जागरूकता के तमाम प्रयासों तथा सुप्रीम कोर्ट व पंजाब सरकार की सख्ती का असर इस बार दीवाली के दिन दिखा है। दीवाली के बाद पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने पिछले साल की तुलना में इस बार प्रदूषण में 29 फीसद गिरावट दर्ज की है। पीपीसीबी के मुताबिक पिछले साल हवा में प्रदूषण की मात्रा 328 एसपीएम रही थी, जबकि इस बार यह मात्रा कम होकर 234 पर आ गई है।

हवा की गुणवत्ता में आए सुधार के बारे में पीपीसीबी के चेयरमैन प्रो. एसएस मरवाहा ने कहा कि दीवाली पर कम पटाखे चलाने को लेकर सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर चलाए जा रहे अभियान के नतीजे सामने आने शुरू हो गए हैं। सामने आए आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल पंजाब  10 एसपीएम (सस्पेंडड पर्टीकुलेट मैटर) 430 और 2.5 एसपीएम 225.63 माइक्रोग्राम मीटर था, जबकि इस वर्ष यह 277 और 126 माइक्रोग्राम मीटर रिकार्ड हुआ है।

एसपीएम 10 में 36 फीसद व एसपीएम 2.5 में 44 फीसद तक आई गिरावट उत्साहजनक संकेत है। इसका श्रेय स्कूल, कालेज और वातावरण प्रेमियों की ओर से किए गए प्रयासों को जाता है। जिन्होंने पटाखों को तिलांजलि देकर ग्रीन दीवाली मनाने को प्राथमिकता दी है। मरवाहा ने आगे भी पंजाबियों से सहयोग की अपील की है ताकि पंजाब की आबोहवा की गुणवत्ता बरकरार रहे।

ग्रीन दीवाली की ओर पंजाब

  • पिछले साल हवा में प्रदूषण की मात्रा 328 एसपीएम थी, इस बार घटकर 234 हुई
  • एसपीएम 10 में 36 फीसद व एसपीएम 2.5 में 44 फीसद तक आई गिरावट
  • पिछले साल 10 एसपीएम 430 था, इस वर्ष यह 277 दर्ज किया गया
  • 2.5 एसपीएम पिछले साल 225.63 था, इस वर्ष यह 126 दर्ज किया गया

प्रदूषण कम होने के पांच प्रमुख कारण

  1. सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखे चलाने का समय रात आठ से दस बजे तय करना।
  2. पंजाब सरकार पुलिस प्रशासन को आदेश देना कि नियमों के खिलाफ पटाखे चले तो संबंधित थाना प्रभारी जिम्मेदार होगा।
  3. पिछले सालों से इस दौरान होने वाले प्रदूषण से सांस लेना मुश्किल होना व स्कूल कॉलेज बंद किया जाना।
  4. जागरूकता व सख्ती से पराली जलाने की घटनाओं में लगातार हो रही कमी।
  5. दीवाली से पहले ही बारिश होने से हवा में धूल व हानिकारक कणों का नीचे आना।

मेंबर सेक्रेटरी करुनेश गर्ग के मुताबिक दीवाली पर रात 8 बजे से सुबह 10 बजे तक वर्ष 2017 में अमृतसर में 10 एसपीएम 214 से 327 रहा था। 2018 में इसी अवधि के दौरान में 10 एसपीएम 162 से 226 रहा और करीब 20 फीसदी प्रदूषण में गिरावट आई।

  • लुधियाना

लुधियाना में वर्ष 2017 दौरान 10 एसपीएम 289 से 377 था, जबकि इस साल 10 एसपीएम 147 से 236 रिकार्ड किया गया।

  • मंडी गोबिंदगढ़

2017 में मंडी गोबिंदगढ़ में 10 एसपीएम 289 था तो इस साल 10 एसपीएम 283 रहा।

  • बठिंडा, पटियाला, जालंधर व खन्ना

वर्ष 2018 में हवा में गुणवत्ता की मात्रा बङ्क्षठडा में 10 एसपीएम 125, जबकि  पटियाला में 10 एसपीएम 150 रही है। जालंधर में 2.5 एसपीएम 205 व खन्ना में 186 रहा है।

क्या है 10 एसपीएम व 2.5 एसपीएम

करुनेश गर्ग के मुताबिक 10 एसपीएम में धूल के कण मापे जाते हैं। इसमें कार्बन, नाइट्रेट जैसे और भी हानिकारक कण मौजूद होते हैं, लेकिन ये कण मोटे होने कारण इन्सान को कम नुकसान पहुंचाते है। 2.5 एसपीएम में इसी तरह के कण काफी बारीक होते हैं और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं।

बारिश ने भी दी राहत : गिल

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) की मौसम विज्ञानी केके गिल ने बताया कि इस बार दीवाली से पहले ही बारिश हो जाने के कारण वातावरण में जो धूल, हानिकारक कण थे, वे नीचे आ गए। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से हवा चली और साथ में बारिश से मौसम साफ हो गया। जिसके कारण प्रदूषण का असर कम हुआ।

पटाखों के कम कारोबार का भी असर : महाजन

पटाखों के थोक व रिटेल कारोबारी रवि महाजन कहते हैैं कि कोर्ट तथा प्रशासन द्वारा सख्ती के चलते इस बार मात्र तीन दिन ही पटाखा बिक्री के लिए मिले। इस वजह से पटाखों का कारोबार उम्मीद से काफी कम हुआ। इसके अलावा पटाखे चलाने के बनाए गए नियम व सख्ती से प्रदूषण कम हुआ है।

कम हो रहा पराली जलाने का रुझान

पीपीसीबी के मुताबिक पराली जलाने के मामले में पिछले तीन सालों से गिरावट दर्ज की जा रही है। सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर जागरूकता व पीपीसीबी की ओर से किए जा रहे जुर्माने का ही यह नतीजा है। 2016 में पंजाब में पराली जलाने के 80,879 मामले सामने आए, जबकि 2017 में 43,660 और 2018 में अब तक 33,687 मामले सामने हैं। इस साल पीपीसीबी ने पराली जलाने वालों को 72 लाख 16 हजार रुपये जुर्माना किया है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt