गौरव सूद, पटियाला

परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ नशे के बढ़ रहे ग्राफ को लेकर लोगों को जागरूक करने में जुटी है गांव रोहटी छन्ना की 37 वर्षीय महिला सरपंच गुरप्रीत कौर। वह काम प्रति इस कदर समर्पित है कि छह बहनों की शादी करके गांव में अकेले रह रही है। उनके पास तीन एकड़ के करीब जमीन है, जिस पर खुद खेती करके गुजारा चलाती हैं। गुरप्रीत ने बताया कि पिता की मौत 2000 और मां की मौत साल 2011 में हुई है। जिसे उन्होंने कमजोरी नहीं बनने दिया और पूरी तरह खुद को गांव की तरक्की के लिए समर्पित कर दिया। गुरप्रीत गैर-राजनीतिक बैकग्राउंड से संबंध रखती हैं और पहली बार ग्राम पंचायत रोहटी छन्ना से चुनाव लड़कर सरपंच चुनी गई। गुरप्रीत ने सरपंच बनते ही सबसे पहले ग्रामीणों की मीटिग बुलाई। जिसमें सबसे पहला मुद्दा नशे का उठाया और इस पर कार्रवाई के लिए मता भी पास किया। इसके साथ ही गांव में किसी भी नशा बेचने वाले व्यक्ति के खिलाफ पुलिस को सहयोग देने की शपथ दिलाई। वहीं प्रस्ताव की कॉपी डीजीपी, एसएसपी और एसडीएम नाभा को भेजकर संबंधित पुलिस चौकी में महिला पुलिस कर्मचारियों को तैनात करके रोहटी पुल पर 24 घंटे नाकाबंदी की मांग की। हालांकि नशे के खिलाफ मुहिम शुरू करने के बाद उन्हें धमकियां आनी शुरू हो गई हैं, लेकिन वह इससे पीछे नहीं हटी और गांव को नशा मुक्त करने पर अड़ी हुई हैं।

गांव के माथे से नशे का कलंक मिटाने की इच्छा : गुरप्रीत

गुरप्रीत कौर ने बताया कि बचपन से गांव में नशा तस्करी के बारे में सुनती आ रही हैं। जिसके चलते मन में शुरू से ही इस कलंक को मिटाने की इच्छा थी। लेकिन कोई कारण ना होने के चलते कुछ नहीं कर सकीं। 2018 में गांववासियों ने उन्हें सरपंच चुना, जिसके चलते उन्होंने इस कलंक को मिटाने के लिए प्रयास शुरू करते हुए मुहिम का आगाज किया।

Posted By: Jagran

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