पटियाला, जागरण संवाददाता: गर्भ अवस्था, प्रसव के दौरान व प्रसव के 42 दिन दिन में महिलाओं की होने वाली मृत्यु के रिव्यू, सर्विलांस व रिस्पोंस संबंधी अलग-अलग सेहत संस्थाओं से आए फीमेल मेडिकल अफसर, स्टाफ नर्स व एएनएम के लिए माता कौशल्या अस्पताल के काफ्रेंस हाल में दो दिन की ट्रेनिंग करवाई गई। ट्रेनिंग में जिला परिवार भलाई अफसर डा.एसजे सिंह, सीनियर मेडिकल अफसर घनौर डा.किरनजोत कौर व जिला मानिटरिंग इवेलुएशन अफसर मोनिका ने प्रोग्राम संबंधी जानकारी दी। इस दौरान सिविल सर्जन डा.वरिंदर गर्ग ने कहा कि पंजाब की मातृ मौत दर 113 है और केंद्र सरकार का लक्ष्य 2030 तक मातृ मौत दर को 100 से कम करना है। उन्होंने कहा कि मातृ मौत को रिव्यू करने का मुख्य मकसद मौत के कारण संबंधी जानकारी प्राप्त करना है ताकि उन कारणों दूर करने का प्रयास किया जा सके। <ङ्कक्चष्टक्त्ररुस्न>जिला परिवार भलाई अफसर डा.एसजे सिंह ने बताया कि मातृ मौत से मतलब एक लाख जिंदा जन्म होने पर होने वाली महिलाओं की मौत की संख्या से है। मौत के कई कारण जैसे कि गर्भवती मां को डिलीवरी होने से अस्पताल में प्रसव करवाने के लिए रैफर पर महिलाओं द्वारा अस्पताल न जाना, गर्भवती महिला द्वारा कोई पुरानी बीमारी होने पर उसकी जानकारी ना देना, डिलीवरी के बाद ज्यादा ब्लड आना, इनफेक्शन होना, ज्यादा ब्लड प्रैशर होना जैसे कई कारण हो सकते हैं।

Edited By: MOHAMMAD AQIB KHAN

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