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पति को 12 तो पत्नी को 14 जगह काटा, पटियाला में पिटबुल का खौफनाक हमला; गंभीर रूप से दंपती घायल

Published: Thu, 13 Aug 2026 09:39 PM (IST)

पटियाला में एक दंपती पर पिटबुल ने हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिसकी वजह सरकारी विभागों की खतरनाक डॉग्स पर प्रतिबंध के आदेशों की अनदेखी है।

पटियाला में पिटबुल का खूनी हमला।

पटियाला में पिटबुल का खूनी हमला।

HighLights

  1. पटियाला में पिटबुल के हमले से दंपती गंभीर घायल।

  2. सरकारी विभागों की अनदेखी से प्रतिबंधित डॉग्स का खतरा।

  3. नगर निगम 15 दिन में डॉग रजिस्ट्रेशन पूरा करेगा।

जागरण संवाददाता, पटियाला। पिटबुल जैसे खतरनाक डॉग्स पर चाहे प्रतिबंध लगा हो लेकिन यह आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। इसके लिए एक नहीं बल्कि दो-दो सरकारी विभाग जिम्मेदार हैं। इनमें पशुपालन विभाग के साथ-साथ नगर निगम भी शामिल है।

इन सरकारी विभागों की इस लापरवाही का खमियाजा पटियाला में एक दंपती को कल बुधवार को तब भुगतना पड़ा जब यह दंपती एक पिटबुल के हमले का शिकार हो गया। इस घटना में जहां पीड़ित महिला शेफाली निवासी पुराना गड्डा खाना, आर्य समाज चौक को करीब 14 जगह पर घाव आए वही उसके पति अंकित सभरवाल भी 12 जगह पर घाव आने से गंभीर रूप से घायल हो गए।

बता दें कि पिटबुल जैसी कई अन्य नस्लों के डॉग्स को खतरनाक मानते हुए सरकार ने उन्हें प्रतिबंधित कर रखा है। इसके लिए ऐसे खतरनाक डॉग्स की चेकिंग का जिम्मा पशुपालन विभाग के पास प्रमुख तौर पर है। जहां तक इस मामले में नगर निगम की भूमिका का सवाल है तो निगम ने ऐसे खतरनाक डॉग्स की रजिस्ट्रेशन करके पूरा ब्यौरा रखना होता है कि उक्त डॉग किस खतरनाक ब्रीड से संबंधित है, उसकी वैक्सीनेशन हुई है या नहीं और इसके साथ ही क्या उसको रखे जाने संबंधी जरूरी नियमों का पालन किया जा रहा है।

बहरहाल इन दोनों सरकारी महकमों की इस संबंध में मौजूदा कार्रवाई के बारे जब दैनिक जागरण ने जानकारी हासिल की तो सामने आया के पशुपालन विभाग ने लंबे समय से पटियाला शहर में ऐसी कोई चेकिंग नहीं की है कि जिसके जरिए जानकारी मिल सके कि किस व्यक्ति ने किस खतरनाक ब्रीड का डॉग रखा हुआ है। दूसरी और इससे संबंध में निगम की लापरवाही का यहीं से अनुमान लगाया जा सकता है कि शहर में विभिन्न किस्म के डॉग्स की ब्रीड के बारे में इससे पहले कोई भी सर्वे वर्ष 2016-17 के दरमियान हुआ था।

निगम जानकारों मुताबिक तब पता चला था कि शहर में करीब विभिन्न ब्रीड के 21 हजार से ज्यादा डॉग्स हैं। उसके बाद अब 10 साल का समय बीतने को हो गया है लेकिन निगम ने अभी तक इस बारे में कोई सर्वे ही नहीं किया है। इतना ही नहीं, निगम ने अभी तक अपनी किसी भी मीटिंग या जनरल हाउस में कभी कोई प्रस्ताव ही नहीं रखा कि घर-घर जाकर जांच की जाए कि कहां किस ब्रीड का डॉग रखा गया है और कौन-कौन सी प्रतिबंधित ब्रीड के डॉग शहर में हैं।

मौजूदा समय में इस मुद्दे पर अगर निगम अधिकारियों से बात की जाए तो वह दबे स्वर में रहते हैं कि डॉग्स के सर्वे संबंधी एक नया साफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। उसे साफ्टवेयर के जरिए यह ब्यौर तैयार किया जाएगा कि शहर में किस ब्रीड के कितने डॉग्स हैं और उनका कौन मालिक है। साथ ही क्या उक्त डॉग्स को रखने के संदर्भ में तय नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।

इस बारे में निगम कमिशनर पुजा स्याल ग्रेवाल ने कहा कि पिटबुल जैसी खतरनाक ब्रीड के डॉग रखने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने इस तरह की खतरनाक ब्रीड का डॉग रखना भी है तो उसे इस बारे में निगम के पास रजिस्ट्रेशन करवाना लाजिमी है। निगम का हेल्थ विंग यह रजिस्ट्रेशन करता है।

उन्होंने कहा कि दंपती पर पिटबुल के आक्रमण की घटना के बाद अब निगम ने तय किया है कि सभी डॉग्स की रजिस्ट्रेशन का कार्य अगले 15 दिन के भीतर पूर्ण कर लिया जाए। पिटबुल जैसे खतरनाक डॉग्स को पालतू कुत्ते के तौर पर रखने पर पाबंदी है और अगर कोई इसे रखता है तो उसकी वैक्सीनेशन और रखने संबंधी अन्य नियमों के पालन की जानकारी डॉग मालिक की ओर से निगम को मुहैया करवानी जरूरी है।

इस मामले संबंधी पशु पालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर बिक्रमजीत सिंह ने बताया कि डॉग की सेल-परचेज के लिए रजिस्टर्ड दुकान होना लाजिमी है। राज्य में मौजूदा समय में अब तक ऐसी 326 पेट शाप्ट की रजिस्ट्रेशन हो चुकी है और यह सिलसिला जारी है। ऐसी शाप्स पर लैबरोडार या जर्मन शेफर्ड कुतों की बिक्री की ही अनुमति होती है न कि पिटबुल जैसे खतरनाक ब्रीड वाले डॉग की।

इन शाप्स पर रखे डॉग की एंटी रैबीज वैक्सीनेशन भी पशु पालन महकमे की ओर से मुफ्त की जाती है। पशु पालन विभाग की ओर से खतरनाक ब्रीड के डॉग की चेकिंग लंबे समय से न किए जाने के बारे उन्होंने कहा कि यह तो डॉग रखने वाले की जिम्मेदारी बनती है कि वह उसके डॉग की ब्रीड की जानकारी निगम के पास मुहैया करवाए।